'जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए...' यह बात आपने भी जरूर सुनी होगी। छोटी-बड़ी बीमारियों से भरी हुई लंबी और बोझिल जिंदगी जीने से कहीं अधिक बेहतर है कि लाइफ भले ही कुछ साल छोटी हो लेकिन स्वस्थ और निरोग होनी चाहिए। मनुष्य के जीवन में ऐसी कई बीमारियां हैं, जो आने से पहले अच्छे-खासे संकेत देती हैं। तो कई बीमारियां ऐसी हैं जो बस चली आती हैं, बिना किसी दस्तक के... ऐसी ही एक स्थिति है अर्थराइटिस की बीमारी। कभी यह सिर्फ बड़ी उम्र में होनेवाली बीमारी हुआ करती थी। लेकिन भोजन की गिरती क्वालिटी के कारण अब छोटी उम्र के बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आने लगे हैं। हर साल 12 अक्टूबर को वर्ल्ड अर्थराइटस डे (World Arthritis Day) मनाया जाता है। ताकि इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके। आइए, इस बीमारी के कारणों और इससे बचाव के बारे में जानते हैं... क्या होती है अर्थराइटिस? -अर्थराइटिस हड्डियों की एक बीमारी है। इसमें पीड़ित व्यक्ति के शरीर के किसी एक जोड़ में या कई जोड़ों में सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है। -अर्थराइटिस के दौरान रोगी के शरीर के जॉइंट्स में नैचरल लूब्रिकेंट की कमी हो जाती है, जिस कारण उसकी हड्डियां सूखी और सख्त होकर एक-दूसरे रगड़ने लगती हैं। इस कारण उसे जोड़ों में दर्द की समस्या होती है। उम्र बढ़ने के साथ यह बीमारी भी बढ़ती जाती है। क्यों होती है जॉइंट्स में चिकानाई की कमी? -हमारी हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए एक नहीं बल्कि अनेक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। लेकिन इनमें कुछ तत्व ऐसे हैं, जिनमें से एक की कमी होने पर भी हमारी हड्डियां खोखली और कमजोर होने लगती हैं। - आपको बता दें कि हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी होता है कि उनके अंदर की मज्जा में कोशिकाओं और प्राकृतिक लुब्रिकेंट्स (चिकनाई) की संतुलित मात्रा हो। इसके लिए आपकी हड्डियों को कैल्शियम, फोलिक एसिड, आयरन, फास्फोरस, जिंक और विटमिन-बी 12 की सबसे अधिक जरूरत है। सिकुड़ जाती है मज्जा -यदि आपकी नियमित डायट में इनमें से किसी एक भी तत्व की कमी होती है तो हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है क्योंकि उनके अंदर की मज्जा सिकुड़ने लगती है। इससे हड्डियों में खोखलापन बढ़ने लगता है। खोखली होने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और हल्का-सा झटका भी बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं। तभी थोड़ा-सा दबाव पड़ने पर हड्डी टूट जाती है। शुरू हो जाती है अर्थराइटिस -यदि आप अपनी हड्डियों में बढ़ते खोखलेपन और कमजोरी को पहचानकर सही समय पर अपनी डायट और सप्लिमेंट्स पर ध्यान नहीं देते हैं तो आनेवाले समय में आपको गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। -अर्थराइटिस का रोग जब खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है तो रोगी अपने बिस्तर से हिल-डुल भी नहीं पाता है और अपनी हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए दूसरों की मदद पर निर्भर हो जाता है। जाहिर है, हममें से कोई भी ऐसा जीवन नहीं जीना चाहेगा जिसमें टॉयलट जाने के लिए भी दूसरे इंसान की जरूरत पड़े। इसलिए अपनी बोन हेल्थ का ध्यान जरूर रखिए। शुरुआत में दिखते हैं ये लक्षण -आपको बता दें कि जब आपके शरीर में हड्डियों के लिए जरूरी इन पोषक तत्वों की कमी होनी शुरू होती है तो इसका सबसे पहला संकेत आपके बाल और नाखून देते हैं। -जिंक, आयरन, फॉलिक एसिड, विटमिन-बी 12 इत्यादि की कमी होने पर आपके नाखून कमजोर होकर टूटने लगते हैं। या परत-परत करके उनके पपड़ी झड़ने लगती है। -आपके बाल तेजी से गिरने लगते हैं और सफेद होने लगते हैं। साथ ही उनकी प्राकृतिक चमक फीकी पड़ जाती है और आपके चेहरे की त्वचा भी कांतिहीन लगने लगती है। -आप इन शुरुआती लक्षणों को पहचानकर डॉक्टर से मिलें और उन्हें अपनी समस्या बताएं। गिरते बाल और टूटते नाखून कई बीमारियों का लक्षण होते हैं। आपकी जांच के बात डॉक्टर आपको सही सलाह और चिकित्सा के बारे में बता पाएंगे।
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