जितनी जल्दी हम सभी इस बात को समझ जाएंगे और स्वीकार कर लेंगे कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। उस समय से हमारा जीवन आज की तुलना में कहीं अधिक खुशहाल बन जाएगा। आज के समय में हम सभी के जीवन में बहुत अधिक तनाव है। बच्चे हों या बड़े हर समय एक मानसिक दबाव में रहते हैं। यह समस्या हमारे जीवन की खुशियां छीन रही है... बढ़ रहा है सीजोफ्रेनिया -सीजोफ्रेनिया एक मानसिक रोग है। आज के समय में इस बीमारी के रोगियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि वर्तमान समय में दुनिया की 20 मिलियन से ज्यादा आबादी इस मानसिक रोग की चपेट में है। -इससे भी ज्यादा डरावनी बात यह है कि इन मरीजों में सबसे अधिक संख्या युवाओं की है। सायकाइट्रिस्ट डॉक्टर जितेंद्र कुमार के अनुसार, 20 से 38 साल के युवाओं में सीजोफ्रेनिया की समस्या सबसे अधिक देखने को मिल रही है। इस समस्या के कई अलग-अलग कारण हो होते हैं। -लेकिन सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि किसी भी युवा के लिए यह उम्र अपना करियर बनाने और जीवन को अपने सपनों के अनुसार एक दिशा देने की होती है। लेकिन मानसिक रोग और खासकर सीजोफ्रेनिया की गिरफ्त में आने के कारण ये लोग अपने करियर और जीवन पर फोकस नहीं कर पाते हैं। -सीजोफ्रेनिया क्यों होता है, इस बारे में कोई स्पष्ट कारण नहीं है। क्योंकि अलग-अलग रोगियों में इस बीमारी के अलग-अलग कारण और ट्रिगर पॉइंट देखने को मिलते हैं। किसी को पारिवारिक तनाव और रिश्तों में अनबन के कारण यह बीमारी अपनी गिरफ्त में ले लेती है। तो कोई आर्थिक समस्याओं के कारण भी इस बीमारी की चपेट में आ जाता है। -दरअसल, मुख्य रूप से यह बीमारी तभी होती है, जब किसी बीमारी या मानसिक आघात के कारण व्यक्ति का थिकिंग प्रॉसेस डिस्टर्ब होता है। जैसे ब्रेन ट्यूमर या सिर में कोई गहरी चोट लगने के कारण भी आगे चलकर सीजोफ्रेनिया की स्थिति बन सकती है। सीजोफ्रेनिया के लक्षण - आपको बता दें कि इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं। फिर चाहे इस बीमारी का कारण कोई चोट हो या कोई बीमारी। शुरुआती स्तर पर रोगी के व्यवहार में बदलाव देखने को मिलता है। जैसे, उसका भावनात्मक व्यवहार बदलने लगता है। -उसकी प्रतिक्रियाओं में बदलाव देखने को मिलता है। जैसे, उसे जिस बात पर हंसना होता है उस स्थिति में वह चाहकर उस तरह नहीं हंस पाता जैसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ पहले इंजॉय करता था। किसी रोने की बात पर या परेशानी की स्थिति में उसके चेहरे के भाव उसका साथ नहीं देते हैं। वह अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाता है। - धीरे-धीरे ये लक्षण बढ़ जाते हैं, डिल्यूजन और हैलुशिनेशन का रूप ले लेते हैं। इन स्थितियों में व्यक्ति वास्तविक परिस्थितियों और काल्पनिक बातों में अंतर नहीं कर पाता है। डिल्यूजन में रोगी जो पहले से सोच चुका होता है, उसके लिए वही दुनिया का अंतिम सत्य होता है। फिर चाहे कोई उसे कितना भी समझाने का प्रयास करे। -वहीं, हैलुशिनेशन की स्थिति में रोगी को तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं। उसे लगता है कि कोई दो लोग उसके बारे में बात कर रहे हैं और कोई षडयंत्र कर रहे हैं। यदि उसे अपने सामने या आस-पास दो लोग बात करते हुए दिखते हैं तो उसे लगता है कि उसी के बारे में बात हो रही है...और लोग उसका मजाक उड़ा रहे हैं या चुगली कर रहे हैं। सीजोफ्रेनिया का इलाज संभव है - डॉक्टर जितेंद्र का कहना है कि सीजोफ्रेनिया का इलाज संभव है। इस बीमारी के इलाज में दवाओं, साइकॉलजिकल सपॉर्ट थेरपी और काउंसलिंग की मदद भी ली जाती है। -जब रोगी की स्थिति में सुधार होने लगता है तो वह सामान्य जीवन जीने लगता है। लेकिन यदि समय रहते इस बीमारी के बारे में ना पता चले और यह गंभीर रूप ले ले तो इस स्थिति में व्यक्ति के ठीक होने में उतना ही अधिक समय लगता है। -इलाज के अभाव में सीजोफ्रेनिया के रोगियों की पर्सनल लाइफ, सोशल लाइफ और करियर जैसी सभी जरूरी चीजें बर्बाद हो सकती हैं। कई बार रोगी खुद अपने अंदर हो रहे बदलावों को नहीं पहचान पाता है। ऐसे में परिवार और दोस्तों की जिम्मेदारी कहीं अधिक बढ़ जाती है। मिलिए अपने एक्सपर्ट से -यह आर्टिकल डॉक्टर जितेंद्र कुमार से बातचीज पर आधारित है। ये दिल्ली स्थित मेडेयॉर हॉस्पिटल में कंसल्टेंट सायकाइट्रिस्ट हैं। आप इनसे मिलने के लिए फोन नंबर-011-41222222 पर संपर्क कर सकते हैं।
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