महिलाओं की सेहत पर Menopause का असर और कुछ फायदे भी - Kal Se Aaj Tak News

“समय के साथ”

Breaking

Home Top Ad

Web hosting

Post Top Ad

Join us to kalseaajtaknew.blogspot.com

Wednesday, October 9, 2019

महिलाओं की सेहत पर Menopause का असर और कुछ फायदे भी

कुछ महिलाओं के लिए मेनोपॉज की स्थिति एक नए जीवन की तरह होती है। सामान्यतौर पर मेनोपॉज 51 साल की उम्र या इसके आस-पास होता है। मेनोपॉज का अर्थ होता है कि महिलाओं के पीरियड्स अब अगले 12 महीने के अंदर पूरी तरह से बंद हो जाएंगे। कुछ महिलाओं में मेनोपॉज की स्थिति 7 साल तक चल सकती है तो कुछ में इसका टाइम और अधिक भी हो सकता है। यह सबकी बॉडी पर डिपेंड करता है। मेनोपॉज की स्थिति में पीरियड्स ना होने पर महिला का पूरा शरीर इससे प्रभावित होता है। कुछ महिलओं के लिए यह स्थिति बेहद सुखद होती है तो कुछ को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि किन-किन तरीकों से मेनोपॉज महिलाओं के शरीर को प्रभावित कर सकता है। यह भी पढ़ें: शरीर पर मेनोपॉज का असर एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन प्रजनन से संबंधित फीमेल हार्मोन्स हैं। बढ़ती उम्र के साथ ओवेरी के काम करने की क्षमता कम होने लगती है तो ओव्यूलेशन नियमित रूप से नहीं होता है। इससे पीरियड्स में अनियमितता या पीरियड मिस होने जैसी दिक्कतें होती हैं। मेनोपॉज के दौरान अंडाशय पूरी तरह से ovulating बंद कर देते हैं। ऐसा अंडाशय द्वारा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के कम उत्पादन के कारण होता है। ऐसे समझें मेनोपॉज हो गया अगर आपको लगातार पिछले 12 महीने से पीरियड्स नहीं हो रहे हैं तो आपको मान लेना चाहिए कि अब आप मेनोपॉज की स्थिति में आ चुकी हैं। इसे भी कहा जाता है। यह स्थिति महिलाओं के जीवन में 40 से 50 साल की उम्र के बीच शुरू हो सकती है और लंबे समय तक रह सकती है। मेनोपॉज का एक अर्थ यह भी होता है कि अब महिला गर्भ धारण नहीं कर सकती। लेकिन एस्ट्रोजन की कमी के शरीर पर कई दूसरे प्रभाव भी पड़ते हैं। क्या पड़ते हैं अन्य प्रभाव? - इस दौरान महिलाओं को वजाइना में ड्राईनेस की समस्या हो सकती है। साथ ही सेक्स की इच्छा खत्म होने लगती है। लेकिन यह पर्मानेंट स्थिति नहीं है। लुब्रिकेंट्स की मदद से इससे निजात पाई जा सकती है। -अगर मेनोपॉज के कारण आपकी सेक्स ड्राइव कम हो रही है तो आप इस बारे में अपनी गाइनी से मदद ले सकती हैं। - रजोनिवृत्ति के प्रभावों में हॉट फ्लैश का जिक्र सबसे अधिक होता है। ये एस्ट्रोजन की कमी से होते हैं और रजोनिवृत्ति के कुछ साल बाद तक भी रह सकते हैं। - हॉट फ्लैशेज का अर्थ अचानक गर्माहट महसूस होना, पसीना आना, त्वचा की चमक बढ़ जाना और आपका पसीने से तरबतर हो जाना होता है। हॉट फ्लैशेज अचानक आते हैं और ये कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकते हैं। -मेनोपॉज का असर महिलाओं के मूड पर भी पड़ता है। किसी एक वक्त में आप खुद को बहुत खुश और खूबसूरत महसूस करते हैं, जबकि कुछ समय बाद आपके इमोश जस्ट उलट हो सकते हैं। - मेनोपॉज के दौरान नींद भी डिस्टर्ब हो सकती है। एस्ट्रोजन की कमी से आनेवाले हॉट फ्लैश आपके जागने की वजह हो सकते हैं, जब आप खुद को पसीने से तर महसूस कर सकती हैं। यह भी पढ़ें: - कुछ स्थिति में मेनोपॉज का असर महिलाओं की यादाश्त पर भी पड़ता है। बढ़ती उम्र के साथ यादाश्त पर असर होना आम बात है लेकिन यह पूरी तरह से साफ नहीं है कि मात्र मेनोपॉज ही इसके लिए जिम्मेदार है या इसके पीछे कुछ और कारण भी छिपे हैं। -कुछ महिलाओं को हंसते, खांसते, वर्कआउट करते, छींकते या कभी-कभी सोते समय भी हल्का यूरिन लीक होने की समस्या हो सकती है। -एस्ट्रोजन का लोअर लेवल बॉडी में कार्डियोवस्कुलर डिजीज का कारण बन सकता है। इस कारण से कॉलेस्ट्रोल का लेवल भी अफेक्ट होता है, जो कई कारणों के चलते हार्ट अटैक की वजह भी बन सकता है। - मेनोपॉज के कारण होनेवाले शारीरिक बदलवों के चलते महिलाओं में हड्डियों से जुड़ी कमजोरी भी देखने को मिलती है। इस कारण उन्हें छोटी चोट पर ही बोन क्रैक होने का खतरा बना रहता है।


from Health Tips in Hindi , natural health tips in hindi, Fitness tips, health tips for women - डेली हेल्थ टिप्स, हेल्थ टिप्स फॉर वीमेन | Navbharat Times https://ift.tt/31ZKGIz
via IFTTT

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Web hosting

Pages