शरीर के लिए अच्छा है या नहीं इस पर लंबे समय से बहस चली आ रही है। ना केवल हेल्थ न्यूज और डायटीशियन्स बल्कि मेडिकल कम्यूनिटी के बीच भी इस बात को लेकर अक्षर अलग-अलग विचार देखने को मिलते हैं। माना जाता है कि रेड मीट और को खाने से डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस विषय पर मेडिकल विशेषज्ञों के एक पैनल ने हाल ही नई गाइडलाइन दी है। उनके अनुसार, लोगों को हैम, सॉसेज हैम, सॉसेज, लंच मीट और बैकन जैसे उत्पादों के उपयोग में फिल्हाल कटौती करने की जरूरत नहीं है। इस पैनल में 7 देशों के एक्सपर्ट्स शामिल रहे। यह भी पढ़ें: पैनल द्वारा जारी की गई रिकमंडेशंस Annals of Internal Medicine में पब्लिश की गईं। ये रिकमंडेशंस nutriRECS की तरफ से पब्लिश कराई गईं। यह विशेषज्ञों का एक संघ है, जो अपना लक्ष्य सोसायटी के लिए भरोसेमंद पोषण संबंधी दिशानिर्देश बनाने के रूप में बताता है। संघ का कहना है कि इसकी गाइडलाइन्स पेशंट्स की वैल्यूज, प्रिफरेंस और उनके अपने मूल्यों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। यह गाइडलाइन उस रिसर्च के बाद सामने आई है, जिसमें पिछले दिनों रेड मीट और प्रॉसेस्ड मीट खाने से होनेवाली बीमारियों के बारे में कहा गया था। कैनेडियन, स्पेनिश और पोलिश शोधकर्ताओं का कहना है कि अपने शोध में उन्हें रेड मीट, प्रॉसेस्ड मीट के सेवन के कारण डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर जैसी बीमारी होने का कोई छोटा-सा लिंक भी नहीं मिला है। यह भी पढ़ें: रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि आमतौर पर नॉर्थ अमेरिका और वेस्टर्न यूरोप में लोग हफ्ते में दो से चार बार रेड मीट और प्रॉसेस्ड मीट खाते हैं। बड़े लोगों को अगर इसके खाने से सेहत से जुड़ी कोई समस्या महसूस नहीं हो रही है तो वे इसे खाना जारी रख सकते हैं। हां, अगर छोड़ना चाहते हैं तो अपनी इच्छा से इसे छोड़ सकते हैं।
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