हाल ही हुई एक रिसर्च में एक हैरान करनेवाली बात सामने आई है। सेलुलर और मोलेक्यूलर मेडिसिन की दुनिया के लिए यह खबर किसी नए चमत्कार की तरह है। हाल ही एक रिसर्च में यह बात साबित हुई है कि कुछ स्ट्रक्चर बहुत अधिक अनस्टेबल या अस्थाई होते हैं। इनका स्थायित्व एक्सपर्ट्स के उस अनुमान से भी कम होता है, जितना अभी तक वे इसके अनस्टेबिलिटी टाइम को मानते थे। यह भी पढ़ें: विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे जीनोम का लगभग आधा हिस्सा रेट्रो-वायरस से बना है। ये सभी डीएनए एलिमेंट्स हैं और हमारी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन रेट्रो-वायरस को अंदर बहुत अधिक गहराई में रखता है ताकि उनसे हमारी कोशिकाओं को किसी तरह का नुकसान ना हो और हमारी बॉडी सेल्स हार्मलेस रहें। यह भी पढ़ें: यूएस के सेलुलर और मोलेक्यूलर मेडिसिन में असोसिएट प्रफेसर केथ मागर्ट के अनुसार, हमने हमेशा हेट्रोक्रोमैटिन की परवाह की है और इस पर स्टडी करते हैं क्योंकि हेट्रोक्रोमैटिन के बिना हमारा शरीर सभी प्रकार की बीमारियों के लिए खुद को खोल देगा और हम किसी बीमारी से बच नहीं पाएंगे। केथ पिछले 25 वर्षों से हेट्रोक्रोमैटिन पर रिसर्च कर रहे हैं और अब उनका फोकस ड्रोसोफिला-the fruit fly के अध्ययन पर है। यह भी पढ़ें: हेट्रोक्रोमैटिन का स्थायित्व हमारी बॉडी सेल्स को रेट्रो वायरस से सुरक्षित रखने के लिए बहुत जरूरी है। केथ सहित इस फील्ड से जुड़े विशेषज्ञों ने करीब 5 साल पहले एक रिसर्च में यह अनुभव किया था कि यह उतना स्टेबल नहीं है, जितना उन्हें लगा था। केथ का कहना है कि हमने उस समय मूल रूप से सोचा था कि यह बहुत स्थिर है और एक बार इन विषैले टॉक्सिन्स पर निर्मित होने के बाद उन्हें बंद कर देता है और हम इनके खतरे से मुक्त हो जाते हैं। लेकिन अब यह थिअरी इस रिसर्च के साथ बदल गई है।
from Health Tips in Hindi , natural health tips in hindi, Fitness tips, health tips for women - डेली हेल्थ टिप्स, हेल्थ टिप्स फॉर वीमेन | Navbharat Times https://ift.tt/2mtbD7T
via IFTTT



No comments:
Post a Comment