कोविड -19 के अलग-अलग वेरिएंट एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। जहां दुनिया पहले से ही ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण कोविड-19 मामलों में आई तेजी से जूझ रही है, वहीं फ्रांस के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे वेरिएंट की तलाश की है, जो ओमिक्रॉन से भी ज्यादा संक्रामक है। वैज्ञानिक रूप से इसका नाम B.1.640.2 है, लेकिन अब इसे ‘IHU' कहा जा रहा है। दरअसल, इस वेरिएंट की खोज फ्रांस के मशहूर 'IHU' मेडिटेरेनियन इंफेक्शन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने की है। इसलिए इसका नाम भी इसी इंस्टीट्यूट के नाम पर रखा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 'IHU' में 46 म्यूटेशन यानी ऑरीजनल वायरस की तुलना में 46 बदलाव पाए गए हैं, जो ओमिक्रॉन से ज्यादा हैं। इसलिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों में इस नए वेरियंट को लेकर चिंता और बढ़ गई है। बता दें कि इस वेरिएंट का पहला मामला 10 दिसंबर को फ्रांस में पता चला। पहली बार यह दक्षिण फ्रांस के मरीज में पाया गया था, जो कैमरून की यात्रा करके लौटा था। लौटने के लगभग दो दिन बाद रोगी को हल्के श्वसन संबंधी लक्षणों का अनुभव होना शुरू हो गया और बाद में SARS-CoV-2 ने इसके संक्रमित होने की पुष्टि की। इसके बाद करीब 11 अन्य मामले सामने आए। नए साल की शुरूआत में सामने आया 'IHU' ओमिक्रॉन से कितना अलग और खतरनाक है जानते हैं यहां।ओमिक्रॉन वेरिएंट के संक्रमण के बीच 'IHU' वेरिएंट ने दस्तक दे दी है। फ्रांस के वैज्ञानिकों ने इस B.1.640.2 वेरिएंट की खोज की है। इसे ओमिक्रॉन से ज्यादा संक्रामक बताया जा रहा है। रिपोट्र्स के मुताबिक नया वेरिएंट 46 बार अपना रूप बदल चुका है, लेकिन तेजी से नहीं फैल रहा इसलिए फिलहाल इससे डरने की जरूरत नहीं है।

कोविड -19 के अलग-अलग वेरिएंट एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। जहां दुनिया पहले से ही ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण कोविड-19 मामलों में आई तेजी से जूझ रही है, वहीं फ्रांस के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे वेरिएंट की तलाश की है, जो ओमिक्रॉन से भी ज्यादा संक्रामक है। वैज्ञानिक रूप से इसका नाम B.1.640.2 है, लेकिन अब इसे ‘IHU' कहा जा रहा है। दरअसल, इस वेरिएंट की खोज फ्रांस के मशहूर
'IHU' मेडिटेरेनियन इंफेक्शन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने की है
। इसलिए इसका नाम भी इसी इंस्टीट्यूट के नाम पर रखा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 'IHU' में 46 म्यूटेशन यानी ऑरीजनल वायरस की तुलना में 46 बदलाव पाए गए हैं, जो ओमिक्रॉन से ज्यादा हैं।
इसलिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों में इस नए वेरियंट को लेकर चिंता और बढ़ गई है। बता दें कि इस वेरिएंट का पहला मामला 10 दिसंबर को फ्रांस में पता चला। पहली बार यह दक्षिण फ्रांस के मरीज में पाया गया था, जो कैमरून की यात्रा करके लौटा था। लौटने के लगभग दो दिन बाद रोगी को हल्के श्वसन संबंधी लक्षणों का अनुभव होना शुरू हो गया और बाद में SARS-CoV-2 ने इसके संक्रमित होने की पुष्टि की। इसके बाद करीब 11 अन्य मामले सामने आए। नए साल की शुरूआत में सामने आया
'IHU' ओमिक्रॉन से कितना अलग और खतरनाक है
जानते हैं यहां।
ओमिक्रॉन की तरह तेजी से नहीं फैलता नया वेरिएंट

फिलहाल राहत की बात है कि वेरिएंट बहुत तेजी से नहीं फैल रहा है। इसलिए ये कितना खतरनाक है , यह पूरी तरह से साफ नहीं है। B.1.640.2 को अब तक अन्य देशों में नहीं देखा गया है और WHO द्वारा इस पर अब तक किसी भी तरह के खतरे या महामारी का लेबल नहीं लगाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए-नए वेरिएंट सामने आते रहेंगे, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये अधिक खतरनाक होंगे। फिलहाल ओमिक्रॉन से पहले ही दुनिया जूझ रही है, ऐसे में 'IHU' ने एक बार फिर नई आशंकाओं को जन्म दे दिया है।
क्या हमें इससे डरने की जरूरत है?

आए इस नए वेरिएंट ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। B.1.640.2 उस दर से नहीं फैल रहा है, इसलिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। यह निश्चित रूप से इतना खतरनाक नहीं है, जितना की ओमिक्रॉन है। वेबसाइट
के मुताबिक इस वेरिएंट का आखिरी बार 25 दिसंबर को पता चला था , उसके बाद ग्लोबल डेटा बेस में कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
वैक्सीन भी नहीं कर सकती काम-

फ्रांस में सामने आए इस 'IHU' वेरिएंट से दुनियाभर में एक बार फिर खलबली मच गई है। जांच में पता चला है कि 'IHU' ओमिक्रॉन की तरह ही आसानी से वैक्सीन की सुरक्षा कवच को चकमा दे सकता है। हालांकि लोगों के लिए यह वेरिएंट कितना घातक साबित होगा, कह पाना मुश्किल है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वेरिएंट ओमिक्रॉन से ज्यादा संक्रामक है
और वैक्सीन का भी इस पर कोई असर नहीं होगा। तब से यहां के वैज्ञानिक इसे लेकर शोध कर रहे हैं।
वैज्ञानिक ने कहा चिंता न करें मगर अलर्ट रहें

दिल्ली के
इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के वैज्ञानिक विनोद स्कोरिया कहते हैं
कि इस समय घबराने या बहुत ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है, लेकिन स्पष्ट रूप से आने वाले दिनों में इस पर करीब से ध्यान देना जरूरी है।
ऐसे वक्त में जब ओमिक्रॉन वेरिएंट ने दुनियाभर में कहर बरपाया हुआ है , यूरोप के कई देशों में हाहाकार मचा हुआ है, भारत में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका है, तब ओमिक्रॉन से भी घातक वेरिएंट का अचानक से सामने आना किसी झटके से कम नहीं है। हालांकि राहत की बात ये है कि ओमिक्रॉन की तरह ‘IHU' स्ट्रेन तेजी से नहीं फैलता। फिर भी हमें पूरी तरह से सर्तक रहने की जरूरत है।
ओमिक्रॉन ही नहीं, कोरोना के इन वेरिएंट ने भी भारत में मचाया है गदर
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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