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Friday, January 21, 2022

इम्यूनिटी के चक्कर में काढ़ा को न बना लेना रेगुलर ड्रिंक, शरीर के ये दो अंग हो जाएंगे जल्दी खराब

सदियों से सर्दी या खांसी होने पर काढ़ा पीने का चलन रहा है। बचपन में मौसमी बीमारी , फ्लू होने पर दादी-नानी दवा के रूप में काढ़ा ही तो दिया करती थीं। हालांकि, जो लोग काढ़े का नाम सुनकर ही नाक मुंह सिकोडऩे लगते थे, कोरोना काल में उन्होंने भी काढ़े का महत्व जाना और इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया। इसका सबसे ज्यादा उपयोग साल 2020 से शुरू हुआ , जब कोविड-19 को सर्दी-जुकाम से जोड़कर देखा गया था। जब कोविड-19 के लक्षण सामान्य सर्दी के रूप में देखे गए , तो ज्यादातर लोग घरों में दालचीनी, तुलसी के पत्ते, अदरक और सोंठ को मिलाकर काढ़ा बनने लगा और तभी से काढ़ा भारतीयों के बीच एक हेल्दी और पॉपुलर ड्रिंक बन गया । बता दें कि इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए काढ़ा बहुत अच्छा विकल्प है। आयुर्वेद में भी काढ़े का सेवन करना प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में बहुत फायदेमंद माना गया है। चूंकि इसमें कई तरह की प्राकृतिक जड़ी-बूटियां और औषधीयों का इस्तेमाल होता है, ऐसे में इस नेचुरल ड्रिंक का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। इम्यूनिटी बढ़ाने और वायरस से संक्रमित होने से बचने के चक्कर में ज्यादातर लोग पिछले दो सालों से नियमित रूप से काढ़ा पी रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा काढ़ा पीने से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से हर छोटी समस्या होने पर काढ़ा बनाकर पीते हैं, उनके शरीर के दो मुख्य अंगों के खराब होने की संभावना ज्यादा होती है।

आयुर्वेद में काढ़े का सेवन करना प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में बहुत फायदेमंद माना गया है। लेकिन विशेषज्ञ की सलाह है कि जरूरत से ज्यादा काढ़ा पीने से शरीर के दो मुख्य अंगों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इसलिए इसका सेवन संतुलित तरीके से करना चाहिए।


 Kadha for Covid: इम्यूनिटी के चक्कर में काढ़ा को न बना लेना रेगुलर ड्रिंक, शरीर के ये दो अंग हो जाएंगे जल्दी खराब

सदियों से सर्दी या खांसी होने पर काढ़ा पीने का चलन रहा है। बचपन में मौसमी बीमारी , फ्लू होने पर दादी-नानी दवा के रूप में काढ़ा ही तो दिया करती थीं। हालांकि, जो लोग काढ़े का नाम सुनकर ही नाक मुंह सिकोडऩे लगते थे, कोरोना काल में उन्होंने भी काढ़े का महत्व जाना और इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया। इसका सबसे ज्यादा उपयोग साल 2020 से शुरू हुआ , जब कोविड-19 को सर्दी-जुकाम से जोड़कर देखा गया था।

जब कोविड-19 के लक्षण सामान्य सर्दी के रूप में देखे गए , तो ज्यादातर लोग घरों में दालचीनी, तुलसी के पत्ते, अदरक और सोंठ को मिलाकर काढ़ा बनने लगा और तभी से काढ़ा भारतीयों के बीच एक हेल्दी और पॉपुलर ड्रिंक बन गया । बता दें कि इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए काढ़ा बहुत अच्छा विकल्प है। आयुर्वेद में भी काढ़े का सेवन करना प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में बहुत फायदेमंद माना गया है। चूंकि इसमें कई तरह की प्राकृतिक जड़ी-बूटियां और औषधीयों का इस्तेमाल होता है, ऐसे में इस नेचुरल ड्रिंक का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

इम्यूनिटी बढ़ाने और वायरस से संक्रमित होने से बचने के चक्कर में ज्यादातर लोग पिछले दो सालों से नियमित रूप से काढ़ा पी रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा काढ़ा पीने से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से हर छोटी समस्या होने पर काढ़ा बनाकर पीते हैं, उनके शरीर के दो मुख्य अंगों के खराब होने की संभावना ज्यादा होती है।



​किडनी और लीवर को हो सकता है नुकसान
​किडनी और लीवर को हो सकता है नुकसान

नवयोग के योगाचर्य डॉ.नवदीप

कहते हैं कि काढ़े में इतनी सारी चीजें नहीं मिलानी चाहिए। डीडी न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि काढ़ा का अधिक सेवन किडनी और लीवर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा है कि काढ़ा पीने से पहले अपने डॉक्टर से यह जरूर जान लें इसमें कौन-कौन सी सामग्री मिलाई जानी है और आपकी मेडिकल कंडीशन के आधार पर आप इसे कैसे ले सकते हैं। डॉ.नवदीप के अनुसार, आयुर्वेदिक ड्रिंक के रूप में काढ़े को संतुलित तरीके से लेने की जरूरत है।



​काढ़ा बनाने के लिए जरूरी सामग्री
​काढ़ा बनाने के लिए जरूरी सामग्री

भारतीय लोग आयुर्वेदिक चिकित्सा पर सालों से भरोसा करते आ रहे हैं। चरक संहिता में पंचविध कश्यपम के अनुसार औषधीय पौधों का सेवन पांच अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है। स्वर (रस), क्वाथ या कड़ा (काढ़ा), कालका (पेस्ट), हिमा (जड़ी-बूटी का मिश्रण), और फैंट। काढ़ा आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन के सबसे आम तरीकों में से एक है। तुलसी, गिलोय, हल्दी, काली मिर्च, अदरक , लौंग, नींबू, अश्वगंधा, इलायची और दालचीनी काढ़ा बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे जरूरी सामग्री हैं। इन अवयवों में ओलेनोलिक एसिड, उर्सोलिक एसिड, रोस्मारिनिक एसिड और येजूनॉल जैसे जरूरी फाइटोकेमिकल्स होते हैं।



​दिन में 1 या 2 बार ही करें काढ़े का सेवन
​दिन में 1 या 2 बार ही करें काढ़े का सेवन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा देशभर के जाने-माने वैद्यों की सलाह से जारी आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, शुंठी और मनुक्का से बने

काढ़े का सेवन दिन में एक या ज्यादा से ज्यादा दो बार

करना चाहिए। इसमें स्वाद के लिए चीनी की जगह पर गुड़ को शामिल कर सकते हैं। इसमें लोगों को 10 ग्राम च्यवनप्राश को शामिल करने की भी सलाह दी गई है, जो 1 चम्मच के बराबर होता है ताकि कोरोनावायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा को बढ़ाया जा सके।



​रिसर्च ने माना, कोविड-19 को नियंत्रित करने में काढ़ा है प्रभावशाली
​रिसर्च ने माना, कोविड-19 को नियंत्रित करने में काढ़ा है प्रभावशाली

यहां तक की कुछ रिसर्च स्टडीज ने भी कोविड-19 को नियंत्रित करने में काढ़ा को प्रभावशाली बताया है। रिसर्च स्टडी के अनुसार, काढ़ा में सभी सामग्री फाइटोकेमिकल्स स्पाइक और न्यूकिल्योप्रोटीन जैसे कोरोनावायरस प्रोटीन से जुड़े हुए हैं। अध्ययनों में इस बात की पुष्टि की गई है कि इस

आयुर्वेदिक ड्रिंक

के नियमित सेवन से वायरस की रोगजनतकता नियंत्रण में रहेगी और रोग की गंभीरती भी काफी कम हो जाएगी।

अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो कोरोना के डर से पिछले दो साल से लगातार काढ़ा पी रहे हैं, तो संभल जाएं। काढ़ा भले ही प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का बढ़िया तरीका है,लेकिन अति हर चीज की बुरी होती है। इसलिए सावधान रहें और स्वस्थ रहने के लिए संतुलित तरीके से इसका सेवन करें।

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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।





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