ऐसा कहा जाता है कि बीमारी घोड़े की रफ्तार से आती है और जाती कछुए की रफ्तार से है। ऐसे में अगर किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षणों की जानकारी हो तो खुद को जल्द से जल्द ठीक करने की कवायद शुरू की जा सकती है। ऐसी ही एक हार्मोनल समस्या है थायराइड। आमतौर पर थायराइड के कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता है, जैसे वजन बढ़ना, थकान, कब्ज आदि। लेकिन अंडरएक्टिव थायरॉयड के कुछ ऐसे लक्षण भी हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है। वहीं इस हार्मोनल समस्या के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कौन से लक्षण हैं जो हाइपोथायरायडिज्म की शुरुआत में आपको देखने को मिल सकते हैं।अगर किसी भी व्यक्ति को किसी बीमारी से ठीक होना है तो जरूरी है कि उसके शुरुआती लक्षणों की पहचान की जा सके। ऐसी ही एक समस्या है हाइपोथायरायडिज्म या अंडरएक्टिव थायराइड। जिसके कुछ ऐसे रहस्यमयी लक्षण है जिसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।

ऐसा कहा जाता है कि बीमारी घोड़े की रफ्तार से आती है और जाती कछुए की रफ्तार से है। ऐसे में अगर किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षणों की जानकारी हो तो खुद को जल्द से जल्द ठीक करने की कवायद शुरू की जा सकती है। ऐसी ही एक हार्मोनल समस्या है थायराइड।
आमतौर पर थायराइड के कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता है, जैसे वजन बढ़ना, थकान, कब्ज आदि। लेकिन अंडरएक्टिव थायरॉयड के कुछ ऐसे लक्षण भी हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है। वहीं इस हार्मोनल समस्या के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कौन से लक्षण हैं जो हाइपोथायरायडिज्म की शुरुआत में आपको देखने को मिल सकते हैं।
क्या है अंडरएक्टिव थायराइड

आपको बता दें थायराइड हमारे गले के निचले स्तर पर मौजूद एक तितली के जैसी दिखने वाली ग्रंथि होती है। इस ग्रंथि का काम तीन तरह के हार्मोन प्रोड्यूस करना होता है, जो रक्तचाप, रक्त का तापमान और हार्ट रेट के रूप में मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का काम करती हैं।
ऐसे में जब यह ग्रंथि हार्मोन को सही मात्रा में रिलीज नहीं कर पाती या पूरी तरह एक्टिव नहीं होती, तो इसकी वजह से पूरे शरीर के कामकाज में बाधा उत्पन्न होने लगती है। जिसकी वजह से हृदय रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, इंफर्टिलिटी और अन्य कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आइए जानते हैं इसी हार्मोनल समस्या से जुड़े हुए कुछ लक्षणों के बारे में।
बाल झड़ना और पतले होना

की कई वजह हो सकती हैं, जैसे तनाव, प्रदूषण आदि। लेकिन बालों के झड़ने की एक वजह हाइपोथायरायडिज्म भी हो सकती है। इस स्थिति में व्यक्ति के न केवल सिर के बाल झड़ने लगते हैं। बल्कि पलकों के बाल भी झड़ने लगते हैं। ऐसा असल में तब होता है जब शरीर में थायराइड हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसकी वजह फोलिकल उभरने की गति भी धीमी हो जाती है। हालांकि बाल झड़ने और पतले होने के लक्षण सभी पर दिखाई नहीं देते। आपको बता दें कि हाइपोथायरायडिज्म होने के तीन से चार महीने के बाद ही यह लक्षण दिखाई देते हैं।
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ड्राई स्किन

एक स्वस्थ और नरिश्ड स्किन थायराइड ग्रंथि के सही प्रकार कार्य करने का प्रमाण होता है। वहीं जब यह गंथि सही तरह से काम नहीं करती तो इसकी वजह से स्किन ड्राई और डल दिखने लगती है। इसके अलावा थायराइड हार्मोन के स्तर के कम होने की वजह से स्किन पतली होने लगती है और इसमें खुजली होने लगती है। वहीं जब स्थिति गंभीर हो तो इसकी वजह से स्कैल्प, पैर और टोज पर भी रूखापन दिखने लगता है।
मूड स्विंग्स

थायराइड हार्मोन का हल्का सा बिगड़ा हुआ स्तर भी व्यक्ति के मूड को पूरी तरह बदल सकता है। इसकी वजह से डिप्रेशन, चिंता और उदासी होने लगती हैं। आमतौर पर इस स्थिति को लोग बेहद साधारण मान लेते हैं। दरअसल ऐसा इसलिए होता है क्योंकि व्यक्ति हाइपोथायरायडिज्म के दौरान व्यक्ति ऊर्जा हीन और थका हुआ महसूस करता है, इसकी वजह से डिप्रेशन, चिंता या उदासी की स्थिति उत्पन्न होने लगती है। ऐसे में कई बार लोग इसे साधारण डिप्रेशन की तरह देखते हैं और उसी तरह उपचार भी कराने लगते हैं। जबकि इसके पीछे की वजह हाइपोथायरायडिज्म होती है।
मस्तिष्क से संबंधित समस्या

अनमैनेज्ड थायराइड की समस्या व्यक्ति के कॉग्निटिव कार्यों को भी प्रभावित कर सकता है। आपको बता दें कि इस स्थिति के दौरान पीड़ित व्यक्ति का फोकस कर पाना या चीजों को याद रख पाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि यह अधिकतर उन लोगों में देखने को मिलता है जिनकी हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति गंभीर हो। वहीं अगर स्थिति अधिक गंभीर ना हो तो ब्रेन फॉग के ही लक्षण देखने को मिलते हैं। हल्की स्थिति में कॉग्निटिव डिक्लाइन की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
सिरदर्द

अब तक हुई कई रिसर्च से पता चला है कि
हाइपोथायरायडिज्म से जूझने वाले
30 प्रतिशत लोगों को सिरदर्द की शिकायत भी रही है। हालांकि यह अब तक साबित नहीं हुआ है कि हाइपोथायरायडिज्म और सिरदर्द का कनेक्शन क्या है। लेकिन हाइपोथायरायडिज्म में मस्तिष्क तक रक्त पहुंचने की गति धीमी हो जाती है, जो सिरदर्द की वजह हो सकती है। वहीं थकावट एक साधारण लक्षण हैं जो हाइपोथायरायडिज्म में महसूस होता है और माना जाता है कि यह माइग्रेन के दर्द को भी ट्रिगर कर सकता है।
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गले में जकड़न

या जलन की वजह से भी गले में जकड़न महसूस हो सकती है। इस दौरान व्यक्ति को कुछ निगलने में भी दिक्कत होने लगती है। वहीं कई मामलों में लोग जब खुद थायराइड ग्रंथि को पकड़कर देखते हैं तो उन्हें यहां सूजन या गले के पास कुछ जमा हुआ सा महसूस होता है।
अंग्रेजी में इस स्टोरी को पढ़ने के लिए
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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