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Monday, December 20, 2021

चेहरे के एक तरफ लकवा मार जाए तो हो सकता है ये बड़ा कारण, जानें कैसे होगा ठीक

बेल्स पाल्सी के बारे में शायद ही ज्यादातर लोग जानते हों। बेल्स पाल्सी को फेशियल पाल्सी और आम भाषा में 'चेहरे का लकवा' भी कहते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है, जब अचानक से चेहरे की एक तरफ की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और इनमें लकवा मार जाता है। इसमें व्यक्ति के चेहरे का एक हिस्सा हिलता नहीं है। प्रभावित हुए हिस्से पर मुस्कुराने या अपनी आंखें बंद करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मांसपेशियों में आई कमजोरी लार, आंसू उत्पादन और स्वाद की भावना को भी प्रभावित कर सकती है। इसका कारण चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका में सूजन को माना गया है। बहुत से लोग इसे स्ट्रोक मान बैठते हैं, लेकिन अगर कमजोरी या लकवा केवल चेहरे को प्रभावित कर रहा है, तो यह बेल्स पाल्सी का संकेत है। 5000 में से एक व्यक्ति हर साल बेल्स पाल्सी से ग्रसित होता है। ज्यादातर मामलों में बेल्स पाल्सी अस्थाई होती है। लगभग 6 महीनों के भीतर पूरी तरह से ठीक होने के साथ लक्षणों में आमतौर पर कुछ हफ्तों के भीतर ही सुधार होना शुरू हो जाता है। हालांकि बेल्स पाल्सी किसी भी उम्र में हो सकती है, फिर भी यह स्थिति 16 से 60 वर्ष के लोगों में होना ज्यादा आम है। यह समस्या चिंताजनक है, लेकिन ज्यादतर लोग पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। तो आइए जानते हैं बेल्स पाल्स के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में।

बेल्स पाल्सी को एक्यूट पेरिफेरल फेशियल पाल्सी के रूप भी जाना जाता है। आम भाषा में इसे चेरे का लकवा भी कहते हैं। ज्यादातर मामलों में बेल्स पाल्सी अस्थाई होती है, जो लगभग 6 महीने में ठीक हो जाती है।


Facial Paralysis: चेहरे के एक तरफ लकवा मार जाए तो हो सकता है ये बड़ा कारण, जानें कैसे होगा ठीक

बेल्स पाल्सी के बारे में शायद ही ज्यादातर लोग जानते हों। बेल्स पाल्सी को फेशियल पाल्सी और आम भाषा में 'चेहरे का लकवा' भी कहते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है, जब अचानक से चेहरे की एक तरफ की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और इनमें लकवा मार जाता है। इसमें व्यक्ति के चेहरे का एक हिस्सा हिलता नहीं है। प्रभावित हुए हिस्से पर मुस्कुराने या अपनी आंखें बंद करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मांसपेशियों में आई कमजोरी लार, आंसू उत्पादन और स्वाद की भावना को भी प्रभावित कर सकती है। इसका कारण चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका में सूजन को माना गया है।

बहुत से लोग इसे स्ट्रोक मान बैठते हैं, लेकिन अगर कमजोरी या लकवा केवल चेहरे को प्रभावित कर रहा है, तो यह बेल्स पाल्सी का संकेत है।

5000

में से एक व्यक्ति हर साल

बेल्स पाल्सी से ग्रसित

होता है। ज्यादातर मामलों में बेल्स पाल्सी अस्थाई होती है। लगभग 6 महीनों के भीतर पूरी तरह से ठीक होने के साथ लक्षणों में आमतौर पर कुछ हफ्तों के भीतर ही सुधार होना शुरू हो जाता है। हालांकि बेल्स पाल्सी किसी भी उम्र में हो सकती है, फिर भी यह स्थिति 16 से 60 वर्ष के लोगों में होना ज्यादा आम है। यह समस्या चिंताजनक है, लेकिन ज्यादतर लोग पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। तो आइए जानते हैं बेल्स पाल्स के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में।



​चेहरे का लकवा किस कारण से होता है
​चेहरे का लकवा किस कारण से होता है

बेल्स पाल्सी तब होती है जब सांतवी कपाल तंत्रिका सूज जाती है, जिससे चेहरे पर कमजोरी का अहसस होता है। यदि चेहरे की नस में सूजन आ गई है , तो यह चीकबोन्स पर आकर दब जाएगी। यह तंत्रिका की प्रोटेक्टिव कवरिंग को नुकसान पहुंचाती है। यदि यह कवरिंग डैमज हो जाए, तो मास्तिष्क से चेहरे की मांसपेशियों तक जाने वाले संकेत ठीक से संचरित नहीं हो सकते। जिससे चेहरे की मांसपेशियों में लकवा मार जाता है।

ऐसा क्यों होता है, इसका सटीक कारण तो स्पष्ट नहीं है, लेकिन

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर एंड स्ट्रोक

के रिसर्चर्स का मानना है कि आमतौर पर ऐसा तब होता है जब एक वायरस तंत्रिका को उत्तेजित करता है। बेल्स पाल्सी में जुड़े वायरस में हर्पीस, चिकन पॉक्स व दाद वायरस, जननांग दाद वायरस, एपस्टीन बार वायरस, साइटोमेगालो वायरस , इंफ्लूएंजा बी और कॉक्ससैकी जैसे वायरस शामिल हैं।



​बेल्स पाल्सी के लक्षण
​बेल्स पाल्सी के लक्षण

चेहरे की नसें पलक झपकना, आंखें खोलना, बंद करना, मुस्कुराना, लार आने को नियंत्रित करती हैं। जब चेहरे की नस खराब हो जाती है, तो यहां बताए गए लक्षण दिखाई देते हैं।

चेहरे के एक तरफ अचानक से कमजोरी आ जाना

आंखों में जलन होना

आंख से पैदा होने वाले आंसूओं की मात्रा में बदलाव

मुंह के एक तरफ से लार टपकना

चेहरे के भावों में कठिनाई आना

प्रभावित हिस्से पर कान के पीछे दर्द



​क्‍या है निदान
​क्‍या है निदान

फेस मसल्स में कमजोरी की सीमा तय करने के जिए पहले डॉक्टर फिजिकल टेस्ट करेगा। डॉक्टर बेल्स पाल्सी का निदान करने के लिए कई तरह के टेस्ट करा सकता है।

बैक्टीरियल और

वायरल इंफेक्शन

के लिए ब्लड टेस्ट

डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के लिए ब्लड टेस्ट

चेहरे की नसों की जांच करने के लिए एमआरआई या सिटी स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट कराने के लिए कह सकता है।

इस दौरान डॉक्टर एक इलेक्ट्रोमोग्राफी टेस्ट के लिए भी कहता है। इसमें मसल्स में बहुत पतले तार इलेक्ट्रोड डाले जाते हैं, ताकि यह पहचाना जा सके कि मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसों को कोई नुकसान हुआ है या नहीं।



​बेल्स पाल्सी का इलाज
​बेल्स पाल्सी का इलाज

अधिकांश लोग 1-2 महीने में पाल्सी से ठीक हो जाते हैं। जिन लोगों की नस गंभीर रूप से डैमेज हुई है, उन्हें आगे के इलाज की जरूरत होती है। वैसे प्रेडनिसोलोन नाम के हार्मोन के साथ उपचार करने से रिकवरी बहुत जल्दी होती है।

जामा ऑटोलैरिंगोलॉजी हैड एंड नेक सर्जरी

के जर्नल में छपी एक स्टडी के में पाया गया है कि प्रेडनिसोलोन अगर शुरूआती 72 घंटों के भीतर दिया जाए, तो 12 महीनों के बाद लक्षणों की गंभीरता को कम किया जा सकता है।

इसके इलाज के लिए डॉक्टर

सूजन को कम करने

वाली कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवाएं लिख सकता है।

यदि कोई वायरस आपकी बेल्स पाल्सी का कारण बनता है, तो डॉक्टर उसे एंटीबैक्टीरियल या एंटीवायरल दवा दे सकता है।

इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन हल्के दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकती हैं।

प्रभावित आंखों को अच्छी तरह से चिकनाई देने के लिए

आई ड्रॉप डालें

बेल्स पाल्सी

आमतौर पर एक अस्थाई स्थिति है। लेकिन इसके लिए बहुत धैर्य की जरूरत होती है। यदि आप किसी भी प्रकार के लकवे का अनुभव करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि हो सकता है आपको स्ट्रोक हो। बेल्स पाल्सी स्ट्रोक के कारण नहीं होती, लेकिन लक्षण लगभग स्ट्रोक जैसे ही होते हैं। इसलिए ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।





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