डिस्यूरिया एक ऐसा यूरीन डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को पेशाब करने में तेज दर्द होता है। यह दर्द मूत्राशय, मूत्रमार्ग व पेरिनेम के क्षेत्र में उठता है। बता दें कि मूत्र मार्ग यानि यूरेथ्रा वह ट्यूब है, जो पेशाब को आपके शरीर के बाहर लाती है। जबकि पुरूषों में अंडकोष और गुदा के बीच के क्षेत्र को पेरिनेम कहा जाता है। दर्दनाक पेशाब होना बहुत आम है। यह मूत्र विकार के तमाम लक्षणों में से एक है। इसमें पेशाब करते समय व्यक्ति को दर्द के साथ चुभन, खुजली और जलन होती है। कई संक्रामक और गैर संक्रामक कारक डिस्यूरिया का कारण बनते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति जानलेवा नहीं है, लेकिन लंबे समय तक इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए, तो डिस्यूरिया रोग की गंभीरती को बढ़ा सकता है और कई जटिलताओं का कारण भी बन सकता है। एक स्टडी के अनुसार, डिस्यूरिया का पता अक्सर तब चलता है जब पेशाब लिंग की जलन और सूजन वाली म्यूकोसल लाइनिंग के सीधे संपर्क में आती है। इसके लक्षण मुख्य रूप से मूत्राशय की चिकनी मांसपेशियों के सिकुड़ने से जुड़े होते हैं, जो मूत्र प्रवाह के दौरान क्षेत्र के पेन रिसेप्टर्स को उत्तेजित करते हैं और फिर दर्द व जलन का कारण बनते हैं। तो आइए जानते हैं डिस्यूरिया के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के तरीकों के बारे में।डिस्यूरिया यूरीन डिसऑर्डर के लक्षणों में से एक है। इसमें पेशाब करते समय दर्द चुभन, खुजली और जलन जैसा महसूस होता है। हालांकि, यह स्थिति जानलेवा नहीं है, लेकिन समय रहते इसका उपचार न किया जाए, तो डिस्यूरिया रोग की गंभीरता को बढ़ा सकता है।

डिस्यूरिया एक ऐसा यूरीन डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को पेशाब करने में तेज दर्द होता है। यह दर्द मूत्राशय, मूत्रमार्ग व पेरिनेम के क्षेत्र में उठता है। बता दें कि मूत्र मार्ग यानि यूरेथ्रा वह ट्यूब है, जो पेशाब को आपके शरीर के बाहर लाती है। जबकि पुरूषों में अंडकोष और गुदा के बीच के क्षेत्र को पेरिनेम कहा जाता है। दर्दनाक पेशाब होना बहुत आम है। यह मूत्र विकार के तमाम लक्षणों में से एक है। इसमें पेशाब करते समय व्यक्ति को दर्द के साथ चुभन, खुजली और जलन होती है। कई संक्रामक और गैर संक्रामक कारक डिस्यूरिया का कारण बनते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति जानलेवा नहीं है, लेकिन लंबे समय तक इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए, तो डिस्यूरिया रोग की गंभीरती को बढ़ा सकता है और कई जटिलताओं का कारण भी बन सकता है।
, डिस्यूरिया का पता अक्सर तब चलता है जब पेशाब लिंग की जलन और सूजन वाली म्यूकोसल लाइनिंग के सीधे संपर्क में आती है। इसके लक्षण मुख्य रूप से मूत्राशय की चिकनी मांसपेशियों के सिकुड़ने से जुड़े होते हैं, जो मूत्र प्रवाह के दौरान क्षेत्र के पेन रिसेप्टर्स को उत्तेजित करते हैं और फिर दर्द व जलन का कारण बनते हैं। तो आइए जानते हैं डिस्यूरिया के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के तरीकों के बारे में।
पेशाब में दर्द के कारण क्या हो सकते हैं

पुरूष और महिलाओं में डिस्यूरिया के कुछ कारण यहां बताए गए हैं-
यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन गोनोकोकल या क्लैमाइडिया संक्रमण -
पेशाब में दर्द होना यूरीनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन एक आम लक्षण है। यूरेथ्रा, ब्लैडर , यूरेटर्स और किडनी आपके यूरेनेरी ट्रेक्ट का निर्माण करते हैं। इनमें से किसी भी अंग में सूजन से पेशाब के दौरान दर्द महसूस हो सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर-
प्रोस्टेट कैंसर वाले लोगों को प्रोस्टेटाइटिस के कारण पेशाब के दौरान दर्द हो सकता है। यह स्थिति प्रोस्टेट ग्लैंड में सूजन आने के कारण पैदा होती है, जो पेशाब में चुभन, जलन और बैचेनी का मुख्य कारण है।
साबुन या टॉयलेट पेपर का उपयोग -
कभी-कभी
केवल संक्रमण के कारण नहीं होता। यह उन प्रोडक्ट्स के कारण भी हो सकता है , जिनका उपयोग आप जननांग क्षेत्रों में करते हैं। साबुन लोशन , टायॅलेट पेपर, कपड़े धोने का डिटर्जेंट पेशाब में जलन पैदा कर सकते हैं।
पथरी-
यदि आपकी किडनी में स्टोन है, तो आपको अक्सर
पेशाब करने में कठिनाई
होगी । कई बार आप दर्द और तेज जलन का अनुभव भी कर सकते हैं।
ऑब्सट्रक्टिव यूरोपैथी -
ऑब्सट्रक्टिव यूरोपैथी तब होती है, जब ब्लैडर के ब्लॉक होने के कारण पेशाब फिर से किडनी में चली जाती है।
यूरेथ्राइटिस-
यूरेथ्राइटिस बताता है कि बैक्टीरियल इंफेक्शन के चलते यूरेथ्रा में सूजन आ गइै है। यूरेथ्राइटिस में अक्सर पेशाब करते समय दर्द होता है और बार-बार पेशाब जाने की अच्छा होती है।
यौन संचारित संक्रमण (STI)-
यदि आप
से पीड़ित हैं, तो स्वभाविक रूप से आपको पेशाब करते में दर्द महसूस होगा। कुछ STI जो पेशाब में दर्द का कारण बनते हैं, उनमें जेनाइटल हर्पीज़, गोनोरिया और क्लैमाइडिया शामिल है।
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डिस्यूरिया के लक्षण

पेशाब में दर्द होना
पेनिस और वेजाइना में डिस्चार्ज होना
लगातार पेशाब आना
पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
पेशाब में खून आना
बुखार , ठंड लगना, पीठ दर्द, मतली, उल्टी जैसा महसूस होना
डिस्यूरिया के जोखिम कारक-

किसी भी महिला और पुरूष में डिस्यूरिया से संक्रमित होने का खतरा बराबर होता है। हालंकि जिन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है, उनमें शामिल हैं-
डायबिटीज वाले लोग
एचआईवी से पीड़ित लोग
गर्भवती महिलाएं
बार-बार होने वाले
मूत्राशय के रोग से पीड़ित
लोग
पोस्टमेनोपोजल वाली महिलाएं और किडनी ट्रांसप्लांट वाले लोग शामिल हैं।
डिस्यूरिया का निदान

, डिस्यूरिया के निदान के लिए सबसे पहले रोगियों के शारीरिक लक्षणों की पहचान करना है। एक डॉक्टर दर्द की जगह , पेशाब का रंग, गंध और सेक्सुअल एक्टिवनेस से जुड़े सवाल पूछ सकता है। American
में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक कुछ स्थितियों में डॉक्टर यूरिनलिसिस, लैब टेस्ट, इमेजिंग इंट्रावेनस यूरोग्राफी और यूरीन कल्चर टेस्ट के लिए कह सकते हैं।
डिस्यूरिया का इलाज

एंटीबायोटिक्स-
यदि डिस्यूरिया कुछ प्रकार के संक्रमण के कारण हुआ है, तो इस स्थिति में डॉक्टर एंटीबायोटिक देते हैं।
अन्य दवाएं-
बुखार, ठंड लगना, उलटी जैसे लक्षण दिखाई देने पर दवाओं से इलाज किया जाता है।
घरेलू उपचार-
प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ,
विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ
, कै्रैनबेरी जूस, अजवायन का तेल और लहसुन जैसे घेरलू उपचार डिस्यूरिया के हल्के लक्षणों का इलाज करने में मदद कर सकते हैं।
डिस्यूरिया से बचाव

पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
लिंग या योनि क्षेत्र में किसी प्रकार के साबुन या कॉस्मेटिक प्रोडक्टस का इस्तेमाल करने से बचें।
सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करें।
अंतरंग अंगों को साफ रखें।
एकसाथ कई लोगों से यौन संबंध बनाने से बचें।
डिस्यूरिया आमतौर पर दवाओं से अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ दिनों में खुजली, दर्द और जलन जैसे हल्के लक्षण दूर न हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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