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जिन घरों में स्पेशल चाइल्ड या स्पेशल अडल्ट फैमिली मेंबर्स होते हैं, उन परिवारों को अन्य लोगों की तुलना में एक अतिरिक्त और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को हर पल निभाना होता है। कोरोना वायरस की महामारी के बाद लगा लॉकडाउन और एक-एक कर हो रहे अनलॉक के बाद सामान्य लोग भी कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्पेशली एबल लोगों के परिवार की दिक्कतें और भी ज्यादा हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने बात की नारायरण सेवा संस्थान के प्रोस्थेटिक्स ऐंड ऑर्थोटिक्स के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉक्टर मानस रंजन साहू से... सबसे पहले दें खान-पान पर ध्यान -स्पेशली एबल्ड सदस्य का ध्यान रखनेवाले परिवारों के बारे में बात करते हुए डॉक्टर मानस रंजन कहते हैं कि सामान्य लोगों की तुलना में फिजिकली चैलेंज्ड लोगों की शारीरिक गतिविधियां बहुत ही कम होती हैं। इसलिए इन लोगों की डायट पर बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत रहती है। ताकि ये मोटापे के शिकार ना हों। -अब जब कोरोना महामारी के दौरान सामान्य लोग भी कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, क्योंकि पार्क, ग्राउंड या सड़क कहीं पर भी कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता है। ऐसे में स्पेशली एबल लोगों के लिए स्थिति थोड़ी और विकट हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी सेहत के साथ ही अपने स्पेशली एबल परिजन का भी पूरा ध्यान रखें। -डॉक्टर रंजन कहते हैं कि फिजिकली चैलेंज्ड लोगों को ऐसी डायट अधिक देनी चाहिए जिसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक हो। कार्बोहाइड्रेट युक्त भोज्य पदार्थ इन लोगों को कम देने चाहिए। खासतौर पर इस मौसम में पत्तेदार सब्जियां, फलियां, सलाद और फल नियमित रूप से खाने चाहिए। इससे स्पेशली चैलेंज्ड लोगों के शरीर को पूरा पोषण प्राप्त होता है और उनके शरीर में गैरजरूरी फैट भी जमा नहीं होता है। फिजियोथेरपी के लिए ना जा पाएं तो क्या करें? -आज भी बाहर निकलने पर कोरोना संक्रमण की चपेट में आने का खतरा लगातार बना हुआ है। साथ ही आर्थिक रूप से भी कई लोगों के लिए इस समय पर फिजियोथेरपी लेना संभव नहीं है। इस स्थिति में घर पर ही आप अपने स्पेशली एबल परिजन को करा सकते हैं। सूक्ष्म व्यायाम का लें सहारा - डॉक्टर रंजन का कहना है कि सूक्ष्म व्यायाम देखने में तो बहुत ही मामलू लगते हैं। लेकिन ये शरीर के रक्त प्रवाह को सही बनाए रखने में बहुत अधिक प्रभावी होते हैं। इसलिए स्पेशियली एबल लोगों को नियमित रूप से सूक्ष्म व्यायाम कराने चाहिए और खुद भी करने चाहिए। मानसिक सहयोग दें और अकेला ना छोड़ें -डॉक्टर मानस का कहना है कि महामारी के बाद का समय कई तरह के संघर्षों से भरा हुआ है। इनमें मानसिक और भावनात्म संघर्ष भी शामिल हैं। क्योंकि अब भी परिजनों के घर जाना, पड़ोसियों से बातें करना या उनके घर जाना उतना सहज और सामान्य नहीं है, जितना कोरोना महामारी के पहले हुआ करता था। मूड स्विंग्स और गुस्से को नियंत्रित करने के लिए अपनाएं ये क्रियाएं -ऐसे में स्वस्थ लोग भी अकेलेपन और निराशा जैसी मानसिक समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। अपने स्पेशली एबल परिजन को इस तरह की समस्याओं से बचाने के लिए आप उनके लिए पूरा समय निकालें। उनसे बात-चीत करते रहें। उनकी क्षमता के अनुसार घर के कामों में उनका सहयोग लें। इससे उनके अंदर नकारात्मकता का भाव नहीं पनपेगा।
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