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उस स्थिति को कहा जाता है, जब हार्ट यानी आपका हृदय शरीर के अन्य अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त पहुंचाने का कार्य सही तरीके से नहीं कर पाता है। इस स्थिति हार्ट की पंप करने की गति कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त हार्ट फेल्यॉर की स्थिति तब भी बनती है जब किसी व्यक्ति की मांसपेशियां बहुत अधिक सख्त हो जाती हैं। इस दौरान उसके शरीर में रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, फिर भले ही हार्ट का पंप ठीक तरीके से काम कर रहा हो। हार्ट फेल्यॉर की स्थिति में हार्ट के दाईं या बाईं तरफ इसका असर दिख सकता है। या फिर दोनों तरफ एक साथ भी यह प्रभाव डाल सकता है। जब तेजी के साथ हार्ट के दोनों तरफ एक साथ यह समस्या होती है तो इसके लक्षण अचानक ही दिखाई पड़ते हैं। जो आमतौर पर जल्दी ही दिखने बंद भी हो जाते हैं। हार्ट फेल होने पर ये लक्षण दिखाई देते हैं - दिल की धड़कने अचानक से बढ़ जाना -गर्दन की नसों में उभार आना। -लगातार खांसी रहना -पेट में सूजन आना -सांस लेने में समस्या होना -भूख ना लगना -बहुत अधिक थकान होना -पैरों में सूजन की समस्या होना -पल्स रेट का अनियमित रहना -वजन का अचानक से बढ़ना इन कारणों से होती है हार्ट फेल्यॉर की समस्या - यदि हार्ट तक ऑक्सीजन पहुंचानेवाली धमनियों (कोरोनरी आर्टरीज) में किसी तरह की रुकावट पैदा हो जाती है तो हार्ट तक रक्त का प्रवाह ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है। इस कारण हृदय रक्त को ठीक से पंप नहीं कर पाता है और हार्ट फेल्यॉर हो जाता है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण हार्ट फेल्यॉर -जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है, उनके हार्ट को शरीर में रक्त की सप्लाई के लिए सामान्य लोगों के हार्ट की तुलना में अधिक काम करना पड़ता है। जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इन लोगों के हार्ट की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं। -बढ़ी हुई मोटाई के कारण इनकी कार्य क्षमता प्रभावित होती है और ये सख्त तथा कमजोर होने लगती हैं। इस कारण ये पंप करने के काम ठीक से नहीं कर पाती हैं और यही स्थिति हार्ट फेल्यॉर की वजह बन जाती है। मायोकार्डिटिस की स्थिति -मायोकार्डिटिस उस स्थिति को कहते हैं, जब वायरस के कारण हार्ट हृदय में सूजन पैदा हो जाती है। इस सूजन के कारण हृदय को पंप करने में दिक्कत होती है और रक्त का संचार ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है। जन्म से हार्ट में वॉल्व होना -जिन लोगों के हार्ट में जन्म से ही वॉल्व होता है, उनके हृदय के स्वस्थ भागों को पंप करने के लिए अतिरिक्त काम करना होता है। यदि समय रहते इस समस्या का उपचार ना कराया जाए और यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो हार्ट फेल्यॉर की स्थिति का सामना करना पड़ जाता है। एरिथिमिया के कारण हार्ट फेल्यॉर -हृदय की धड़कन का असामान्य रहना एरिथिमिया कहलाता है। एरिथिमिया की स्थिति यदि लंबे समय तक बनी रहती है तो हार्ट कमजोर हो जाता है। इस कारण हृदय की विफलता यानी हार्ट फेल्यॉर की स्थिति बन जाती है। हार्ट फेल्यॉर के अन्य कारण -यदि शरीर में ऐसी कोई भी बीमारी होती है, जिसके कारण हार्ट को अपनी क्षमता से अधिक काम करना पड़ता है तो यह स्थिति हार्ट फेल्यॉर की वजह बन जाती है। जैसे, लिवर की बीमारी, किडनी का खराब होना, , एचआईवी, शरीर में प्रोटीन का जमाव होना भी हार्ट फेल्यॉर का कारण बन सकते हैं। -कई बार वायरस के कारण हुए संक्रमण, फेफड़ों में रक्त के थक्के जमना, किसी दवाई के रिऐक्शन के कारण या किसी एलर्जी के कारण भी हार्ट फेल्यॉर की स्थिति बन जाती है।
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