कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को बढ़ाने में आईबीएस यानी इरिटेबल बॉउल सिंड्रोम का कोई रोल नहीं होता है। इसके साथ आईबीएस की समस्या आंत के ऊतकों में परिवर्तन के लिए भी जिम्मेदार नहीं होती है। हालांकि इस समस्या का बुरा असर बड़ी आंत की कार्यप्रणाली और सेहत पर जरूर पड़ता है।पेट में तेज मरोड़ उठना और पॉटी करते वक्त दर्द होना जैसी समस्याओं की वजह हो सकता है इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (irritable bowel syndrome )

कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को बढ़ाने में आईबीएस यानी इरिटेबल बॉउल सिंड्रोम का कोई रोल नहीं होता है। इसके साथ आईबीएस की समस्या आंत के ऊतकों में परिवर्तन के लिए भी जिम्मेदार नहीं होती है। हालांकि इस समस्या का बुरा असर बड़ी आंत की कार्यप्रणाली और सेहत पर जरूर पड़ता है।
इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं

-हमारे शरीर में बड़ी आंत को प्रभावित करने वाली जितनी बीमारियां होती हैं, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम भी उनमें शामिल है। लेकिन यह आंत के ऊतकों में किसी तरह के परिवर्तन के लिए जिम्मेदार नहीं होता है।
-आमतौर पर लोगों को इस डिसऑर्डर के बारे में तब पता चलता है, जब यह अपने खतरनाक रूप में पहुंच जाता है। क्योंकि इस डिसऑर्डर के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं और इन्हें ज्यादातर लोग अनदेखा कर देते हैं।
संभालने में लगता है अधिक समय

-पेट में मरोड़ उठना, दर्द होना, पेट फूलना, गैस की समस्या होना, डायरिया होना या कब्ज की समस्या होना जैसी परेशानिया इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के दौरान होती हैं। ये समस्याएं जब बहुत अधिक बढ़ जाती है तो इस डिसऑर्डर को पूरी तरह नियंत्रित करने में बहुत अधिक समय लगता है।
बहुत कम लोग पहुंचते हैं इस हालत में

-हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत ही कम लोगों में आईबीएस के गंभीर लक्षण नजर आते हैं क्योंकि आमतौर पर इस समस्या के लक्षणों को अपनी डायट को मैनेज करके नियंत्रित किया जा सकता है।
ऐसे लोगों में बढ़ नहीं पाती बीमारी

-ऐसे में जो लोग अपने भोजन को लेकर जागरूक होते हैं, वे कम समस्या होने पर ही खान-पान में सुधार के साथ इस समस्या को बढ़ने से रोक लेते हैं। हालांकि ज्यादतर लोगों को यह पता नहीं होता है कि आखिर उन्हें इस तरह की समस्याएं हो क्यों रही हैं।
आईबीएस के लक्षणों की जानकारी

-इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (Irratible Bowel Syndrome)के रोगियों को आमतौर पर पेट और पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
-आईबीएस को रोगी को पेट में मरोड़ होने और पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द होने की समस्या आमतौर पर मल त्याग (पॉटी के समय) करते वक्त होती है।
-आईबीएस के रोगियों के पेट में बहुत अधिक गैस बनती है। अक्सर इस गैस के कारण वे असहज रहते हैं और यह गैस सिरदर्द या शरीर के अन्य अंगों में दर्द का कारण बन जाती है।
डायरिया और कब्ज

-यह स्थिति थोड़ी कंफ्यूजिंग है। लेकिन ऐसा होता है कि आईबीएस के रोगी में कभी डायरिया की स्थिति होती है तो कभी कब्ज की समस्या हो जाती है। कई रोगियों को सिर्फ डायरिया या सिर्फ कब्ज रहता है तो कई रोगियों को समय-समय पर ये दोनों समस्याएं हो जाती हैं।
-इसके साथ ही इन रोगियों को पॉटी के साथ म्यूकस आने की समस्या भी होती है। इनकी पॉटी फ्लश में बहुत अधिक चिपकती है, जिस कारण दो से तीन बार फ्लश करने के बाद ही सीट साफ हो पाती है।
जरूर लें डॉक्टर की सलाह

-यह और बात है कि आईबीएस के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहे और आप इन्हें लगातार अनदेखा करते रहते हैं तो साधारण-सी दिखनेवाली ये समस्याएं कोलोन कैंसर का कारण बन सकती हैं।
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