भारत को शुगर के रोगियों की राजधानी कहा जाता है। क्योंकि हमारे देश में दुनिया के सबसे अधिक डायबिटिक पेशंट रहते हैं। इसके साथ ही हमारे देश में दुनियाभर के युवाओं की एक बड़ी आबादी भी रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में आप अक्सर सुनते होंगे कि हमारा राष्ट्र एक युवा राष्ट्र है। इसलिए हमारे देश में अपार ऊर्जा और अपार संभावनाएं हैं...हमारे देश में बढ़ते शुगर रोगियों का एक बड़ा कारण नींद की कमी हो सकता है, यहां जानें क्यों सामने आ रही है यह बात...

भारत को शुगर के रोगियों की राजधानी कहा जाता है। क्योंकि हमारे देश में दुनिया के सबसे अधिक डायबिटिक पेशंट रहते हैं। इसके साथ ही हमारे देश में दुनियाभर के युवाओं की एक बड़ी आबादी भी रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में आप अक्सर सुनते होंगे कि हमारा राष्ट्र एक युवा राष्ट्र है। इसलिए हमारे देश में अपार ऊर्जा और अपार संभावनाएं हैं...
सपने पूरे करने के लिए सजगता जरूरी

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे देश के युवाओं को उनकी क्षमता और शक्ति का अहसास कराने के लिए बार-बार यह बात करते हैं कि हम एक युवा देश हैं। लेकिन हमारे देश के युवा अपनी शक्ति का पूरा उपयोग तभी कर पाएंगे जब वे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेंगे।
तेजी से बढ़ रहे हैं युवा रोगी

-हमारे देश में युवा रोगियों की संख्या में भी काफी तेजी से वृद्धि हो रही है। इसका मुख्य कारण है खान-पान और सेहत को लेकर बरती जा रही लापरवाही। यह एक बड़ी वजह है कि जिस कारण हमारे देश में ना केवल टाइप-1 बल्कि टाइप-2 डायबिटीज के रोगी भी बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।
एक नया कारण आया है सामने

-अब तक माना जाता रहा है कि टाइप-2 डायबिटीज की शिकायत आमतौर पर खान-पान और लाइफस्टाइल से जुड़ी दिक्कतों के चलते होती है। लेकिन हालही हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि टाइप-2 डायबिटीज की समस्या का एक बड़ा कारण इंसोमनिया भी है।
क्या होता है इंसोमनिया?

-नींद ना आने की बीमारी को इंसोमनिया कहा जाता है। जो लोग चाहकर भी सो नहीं पाते हैं, वे इस बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं। इंसोमनिया की समस्या तनाव, एंग्जाइटी और डिप्रेशन की वजह से भी हो सकती है। क्योंकि इन मानसिक समस्याओं के कारण हमारे ब्रेन में हॉर्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है और नींद प्रभावित होती है।
क्या है इंसोमनिया का शुगर से लिंक?

-पिछले दिनों यूके के वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों को इंसोमनिया की शिकायत होती है, उनमें डायबिटीज टाइप-2 का खतरा उन लोगों की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक हो जाता है, जिनमें यह रोग नहीं होता है।
आपको बरतनी होगी यह सतर्कता

-स्वयं और अपने परिवार को डायबिटीज टाइप-2 के खतरे से बचाए रखने के लिए जरूरी है कि आप इस बात का ध्यान रखें कि सोने का एक निश्चित समय हो। सोने और जागने का समय निश्चित होने पर हमारे शरीर की बायॉलजिकल क्लॉक ठीक तरह से काम करती है।
-इससे हमें हॉर्मोन्स से जुड़ी बीमारियां नहीं होती हैं, हमारा शरीर स्वस्थ रहता है तो दिमाग भी शांति से काम कर पाता है और नींद के लिए जरूरी मेलाटॉनिन हॉर्मोन को सही मात्रा में प्रड्यूस कर पाता है।
खतरनाक है नींद न आने की बीमारी, ऐसे करें बचाव
ऑफिस में सारा दिन आती रहती है नींद? ऐसे करें दूर
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