हमारे देश में अब मेंटल हेल्थ और मानसिक बीमारियों को लेकर जागरूकता बढ़ने लगी है। अब लोगों के लिए मानसिक रोग का अर्थ सिर्फ पागलपन नहीं होता है, जैसा कि करीब 1 दशक पहले तक हुआ करता था। इस जागरूकता में टेक्नॉलजी के साथ ही फिल्मों और अवेयरनेस प्रोग्राम्स ने बड़ा योगदान दिया है।यहां जानें कि कैसे युवावस्था में हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर आप बड़ी उम्र में अल्जाइमर की समस्या से बच सकते हैं। साथ ही इस बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों को कैसे पहचानें...

हमारे देश में अब मेंटल हेल्थ और मानसिक बीमारियों को लेकर जागरूकता बढ़ने लगी है। अब लोगों के लिए मानसिक रोग का अर्थ सिर्फ पागलपन नहीं होता है, जैसा कि करीब 1 दशक पहले तक हुआ करता था। इस जागरूकता में टेक्नॉलजी के साथ ही फिल्मों और अवेयरनेस प्रोग्राम्स ने बड़ा योगदान दिया है।
बड़ी संख्या में मरीज

सायकाइट्रिस्ट्स से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस समय देश में अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों की संख्या 15 लाख से अधिक है। यहां अल्जाइमर से जुड़े उन फैक्ट्स के बारे में बताया जा रहा है, जिनके बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है... क्योंकि डिमेंशिया के करीब 40 लाख रोगियों में 15 लाख से अधिक लोग सिर्फ अल्जाइमर से पीड़ित बताए जाते हैं।
क्या होता है अल्जाइमर?

-अल्जाइमर एक मानसिक रोग होता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है। वह व्यक्ति चीजों और घटनाओं के बारे में भूलने लगता है। लेकिन जब यह बीमारी अपनी अडवांस्ड स्टेज यानी और भी गंभीर स्थिति में पहुंच जाती है तो रोगी अपने परिवार के सदस्यों को भी भूलने लगता है।
-अल्जाइमर का रोग कुछ भी याद नहीं रख पाता है। यहां तक कि अपने परिवार, रिश्तों और घर का पता तक भूल जाता है। इस स्थिति में रोगी को हर समय एक केयर-टेकर की जरूरत होती है। क्योंकि वे बिना कुछ सोच-समझे बस यूं ही कहीं भी चले जाते हैं और भूल जाते हैं कि आखिर वे कौन हैं और कहां जा रहे हैं आदि।
डिमेंशिया और अल्जाइमर में अंतर

-आमतौर पर लोगों को अल्जाइमर और डिमेंशिया में अंतर करने में समस्या आती है। आपको बता दें कि अल्जाइमर, डिमेंशिया का ही एक भाग है। क्योंकि डिमेंशिया में अल्जाइमर, टेंपोरल डिमेंशिया और वैस्कुलर डिमेंशिया जैसी अन्य बीमारियां शामिल हैं।
डरावनी स्थिति

ये बातें जितनी हैरान करनेवाली हैं, उतनी ही डरावनी भी हैं। क्योंकि इस स्थिति में अपने प्रियजन को ढूंढना और लगातार उनकी देखभाल करना बहुत अधिक जिम्मेदारी का काम होता है। इसलिए जरूरी है कि आपको अल्जाइमर से जुड़ी जरूरी बातें पता होनी चाहिए।
अल्जाइमर के प्रारंभिक लक्षण और उपचार

-यदि अल्जाइमर की समस्या के बारे में तभी पता चल जाए, जब यह बीमारी अपने प्रारंभिक स्तर पर हो तो इस बीमारी को खतरनाक स्तर तक बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है। जबकि कुछ केस में इस बीमारी को नियंत्रित भी किया जा सकता है।
-जब किसी व्यक्ति में अल्जाइमर अपनी प्रारंभिक स्थिति में होता है तो वह व्यक्ति, दैनिक कार्यों, घर के आस-पास के रास्तों, तारीख इत्यादि को भूलने लगता है। वह किसी काम को करते-करते भूल जाता है कि आखिर वह क्या और क्यों कर रहा था।
-व्यक्ति दूसरों पर भरोसा नहीं कर पाता है, उसे किसी से बात करने में बहुत रुचि नहीं रहती है। ये लोग या तो समाज से एकदम कट जाते हैं या बेवजह इधर-उधर घूमते रहते हैं। इनकी बॉडी लैंग्वेज और आत्मविश्वास का स्तर पहले के मुकाबले काफी कमजोर हो जाता है।
इलाज से जुड़ी बातें

-एक बात पूरी तरह साफ है कि अल्जाइमर को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है। लेकिन दवाओं के जरिए रोगी के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।
-इसके साथ ही आप सही लाइफस्टाइल और खान-पान को अपनाकर भविष्य में इस तरह की बीमारी की चपेट में आने से खुद को बचा सकते हैं। यानी आप टीनऐज से ही अपनी सेहत और जीवन को लेकर सात्विक तरीके और आयुर्वेदिक पद्धित अपनाएं।
-रात को बिस्तर पर जाने के बाद मोबाइल का उपयोग ना करें। अपनी डायट में फलों को शामिल करें, प्रतिदिन योग और ध्यान करें। साथ ही जिम, वॉक या रनिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
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