मंगलवार (11 अगस्त) को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस बात की घोषणा कर दी कि उनके देश ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए दुनिया की पहली वैक्सीन बना ली है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस वैक्सीन को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी अप्रूव्ड कर दिया है और खुद पुतिन ने अपनी बेटी को इस कोरोना वैक्सीन का टीका लगवाया है। लेकिन बिना डेटा सार्वजनिक किए तैयार की गई इस वैक्सीन के प्रति इतनेभर से विश्वास नहीं जीता जा सकता। यही वजह है कि यूके खुलकर कह रहा है कि वह अपने देश के लोगों को इस वैक्सीन का टीका नहीं लगाएगा तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले इस वैक्सीन पर चिंता जताई और बाद में इस वैक्सीन के प्रभावशाली होने के सबूत मांगे... यह कह रहा है WHO -विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रूस ने इस वैक्सीन से जुड़ी सभी रिसर्च और स्टडीज को सार्वजनिक करने के लिए कहा है। इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वैक्सीन को रजिस्टर करने से पहले इसका क्लिनिकल ट्रायल पूरा करने के लिए भी कहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रूस द्वारा तैयार की गई 'स्पुतनिक-V'वैक्सीन के प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की थी। यूके ने साफ कर दी है यह बात -'स्पुतनिक-V' वैक्सीन के स्वास्थ्य पर असर और इसकी रिसर्च संबंधी जांच पर संशय के चलते यूनाइटेड स्टेट इस बात को साफ कर चुका है कि वह अपने देशवासियों को यह वैक्सीन नहीं लगाएगा। दुनियाभर और खासतौर पर अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर ब्राजील के राजनीतिक एनालिस्ट्स गिल्वर्ट डॉक्टर्स का कहना है कि रूसी वैक्सीन पर पश्चिमी देश इसलिए अधिक सवाल उठा रहे हैं क्योंकि उनके लिए रूस का पहले वैक्सीन बना लेना 'अंगूर खट्टे हैं' जैसा अनुभव है। कैसे रूस ने छोड़ दिया सबको पीछे? -रूस द्वारा इतनी जल्दी वैक्सीन बना लेने पर भले ही दुनिया के कई देश खासतौर पर वेस्टर्न कंपनियां सवाल उठा रही हैं। लेकिन यह बात जाननी चाहिए कि आखिर रूस ने कैसे इतनी जल्दी कोरोना वैक्सीन को विकसित कर लिया और किस तरह खुद रूस के राष्ट्रपति को इस वैक्सीन पर इतना भरोसा है कि उन्होंने खुद अपनी बेटी पर इसका ट्रायल होने दिया... -दरअसल, स्पूतनिक-V वैक्सीन बनाने के लिए रूस ने जिस तकनीक का उपयोग किया है, उस पर रूस को जीरो से काम नहीं करना पड़ा। क्योंकि इबोला वायरस के संक्रमण को खत्म करने के लिए उसकी वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया रूस में कई साल पहले से चल रही थी। इसी तकनीक का उपयोग करते हुए रूसी वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने का काम किया और दुनिया में सबसे पहले यह चमत्कार कर दिखाया। वैक्सीन बनाने में रूस ने किया इस तकनीक का उपयोग -रूसी वैज्ञानिको ने कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित करने के लिए जिस तकनीक का उपयोग किया है, उसे वायरल वेक्टर (Viral vectors) कहते हैं। यह एक ऐसी तकनीक है, जिसके टूल्स का उपयोग करके आणविक जीवविज्ञानी (molecular biologists) कोशिकाओं में अनुवांशिकी से जुड़े पदार्थ (genetic material) पहुंचाने का काम करते हैं। -इस प्रक्रिया की मदद से जीवविज्ञानी लैब के अंदर किसी भी वायरस के डीएनए की कॉपीज तैयार करते हैं। ताकि उनकी संरचना को गहराई से जानकर उनके व्यवहार के बारे में अधिक से अधिक पता लगाया जा सके। -इस प्रक्रिया को किसी जीवित जीव (Organism) और कोशिका (Cell)के अंदर किया जाता है। इसके जरिए वायरस द्वारा अपने जीनोम को संक्रमित कोशिकाओं के अंदर कुशलता से ले जाने के लिए विकसित किए गए विशेष आणविक तंत्र को समझने में मदद मिलती है।
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