लिवर में बड़ी मात्रा में फैट बनने के कारण जो अलग-अलग तरह की बीमारियां और बीमारी होने की स्थितियां बनती हैं उन्हें नॉन-अल्कोहॉलिक डिजीज (एनएएफएलडी) कहा जाता है। ये परेशानियां आमतौर पर उन लोगों में देखने को मिलती है, जो फैटी होते हैं या ओवरवेट होते हैं। एक हेल्दी लिवर में फैट की मात्रा बहुत कम होती है या बिल्कुल नहीं होती है। एक अनुमान के मुताबिक यूके में हर 3 में से 1 व्यक्ति में एनएएफएलडी के शुरुआती लक्षण देखे जा सकते हैं, उनके लिवर में कम मात्रा में ही सही लेकिन फैट जमा होने लगा है। हालांकि एनएएफएलडी आमतौर पर अपने शुरुआती चरण में कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। लेकिन यह लिवर के लिए बहुत अधिक घातक हो सकता है। अगर यह स्थिति बहुत अधिक बिगड़ जाए तो सिरोसिस की गंभीर समस्या हो सकती है। लिवर में अधिक फैट जमा होना सेहत के लिए कई अन्य बीमारियों की वजह बन सकता है। इनमें , हाई ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी बीमारियां पहले नंबर पर आती हैं। यह भी पढ़ें: अगर आपको पहले से डायबिटीज है तो एनएएफएलडी के कारण आपको होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। अगर NAFLD के लक्षणों की जांच इनके शुरुआती स्तर पर ही हो जाए तो स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है। साथ ही लिवर में जमा होनेवाले फैट की मात्रा को भी नियंत्रित किया जा सकता है। यह भी पढ़ें:
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