डेंगू से बचाव के लिए ब्राजील में अपनाया जाने वाला एक तरीका दिल्ली में भी अपनाया जा सकता है। फिलहाल पुडुचेरी स्थित वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर (VCRC) की लैब में इसे लेकर रिसर्च चल रही है। इसके तहत एक खास प्रकार के वॉलबेकिया (Wolbachia) बैक्टीरिया की मदद से एडिस मच्छरों में डेंगू वायरस फैलाने की क्षमता को ही खत्म कर दिया जा रहा है। हालांकि अभी यह शुरुआती स्टेज है। डॉक्टरों का मानना है कि मच्छरों को खत्म कर पाना आसान नहीं है। ऐसे में मच्छरों में बायोलॉजिकल बदलाव कर डेंगू को कंट्रोल करने की संभावना दिख रही है। अच्छी बात यह है कि भारत में भी इस दिशा में काम शुरू हो गया है। डॉक्टर डी के दास के अनुसार, वॉलबेकिया पर विशाखापटनम में भी स्टडी चल रही है। अभी यह शुरुआती स्टेज में है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह तरीका भारत और दिल्ली के लिए कितना कारगर है। डॉक्टर दास का यह भी कहना है कि मच्छर को खत्म करना संभव नहीं है। इसलिए डेंगू जैसी बीमारी को कंट्रोल करने के लिए मच्छरों में बायॉलजिकल बदलाव का तरीका ही लोगों को इस बीमारी से बचा सकता है। इसलिए अब इसके अल्टरनेटिव तरीके पर पूरी दुनिया में रिसर्च शुरू हो चुकी है। इनमें से एक वॉलबेकिया बैक्टीरिया है। यह भी पढ़ें: दास ने कहा कि यह बैक्टीरिया इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है। लेकिन यह बैक्टीरिया मच्छरों के अंदर इस प्रकार का एंटीबॉडी बनाता है कि उनमें डेंगू वायरस फैलाने की क्षमता ही खत्म हो जाती है। यह तरीका बिल्कुल अलग है। इसमें एडिस मच्छर का बायोलॉजिकल बदलाव किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले कुछ मच्छरों में वॉलबेकिया बैक्टीरिया डाल दिया जाता है। जब यह बैक्टीरिया बढ़ने लगता है तो इन्हें बाहर छोड़ दिया जाता है। इसमें नर और मादा मच्छर दोनों को इस प्रोसेस से गुजारा जाता है, जिससे इन मच्छरों का इम्यून सिस्टम स्ट्रांग हो जाता है, जिससे डेंगू वायरस का प्रभाव नहीं होता है और वह इससे संक्रमित नहीं होता हैं। अब ऐसे मच्छरों के री-प्रोडक्शन से पैदा होने वाले नए मच्छर भी इसी तरह से होते हैं। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती जाएगी और नए मच्छर डेंगू वायरस फ्री हो जाएंगे। आईएमए के पूर्व प्रेसिडेंट डॉक्टर के के अग्रवाल का कहना है कि भारत जैसे विशाल देश के लिए यह तरीका कितना कारगर होगा, यह रिसर्च के बाद ही पता चलेगा। लेकिन निश्चित रूप से बायोलॉजिकल बदलाव का यह तरीका डेंगू को कम करने में कारगर साबित हो सकता है। वहीं, गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर अतुल गोगिया का भी यही कहना है कि यह बिल्कुल ही नया तरीका है। इस दिशा में सोचना और इस पर बड़े स्तर पर स्टडी की जरूरत है। अभी छोटे स्तर पर स्टडी चल रही है, जिससे उम्मीद बढ़ी है। यह भी पढ़ें: केस 1 : नर व मादा मच्छरों को वॉलबेकिया बैक्टीरिया से संक्रमित करने पर उससे पैदा होने वाले नए एडिस मच्छर में डेंगू वायरस नहीं आएगा। इससे इंसानों में डेंगू वायरस नहीं पहुंचा पाएगा। केस 2: डेंगू फैलाने वाले एडिस मच्छरों में से अगर केवल एडिस मादा मच्छरों को इस बैक्टीरिया से संक्रमित कर दिया जाए तो उससे पैदा होने वाले नए मच्छर में भी डेंगू वायरस फैलाने की क्षमता नहीं होगी। केस 3 : अगर केवल नर मच्छरों को ही इस बैक्टीरिया से संक्रमित कर दिया जाए तो उससे अंडा ही डिवेलप नहीं होगा
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