हाल ही हुई एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया है कि जिन महिलाओं को की बीमारी होती है उनमें टेस्टोस्टेरोन का लेवल उन महिलाओं की तुलना में काफी कम होता है, जिन्हे यह बीमारी नहीं है। टेस्टोस्टेरोन एक ऐसा हॉर्मोन है, जो शरीर में सेक्स की इच्छा को बनाए रखने का कार्य करता है। खासतौर पर इसे एक मेल हॉर्मोन के रूप में जाना जाता है। लेकिन महिलाओं के शरीर में भी एक नियत स्तर तक यह पाया जाता है। शोध के ऑर्थर और यूएस की यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के जुआन सी सेलेडन के अनुसार, हमारी रिसर्च में जिस तरह के रिजल्ट सामने आए हैं, उनसे यह साबित होता है कि सेक्सुअल हॉर्मोन ऐस्ट्राडिऑल और फ्री टेस्टोस्टेरोन यानी जो प्रोटीन से अटैच्ड नहीं है, ये अस्थमा पेशंट्स के शरीर में सेक्स डिफरेंस करने में बड़ा रोल प्ले करते हैं। इस शोध को अमेरिकन जनरल ऑफ रेसपिरेट्री ऐंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है। यह भी पढ़ें: अध्ययन में पाया गया कि सेक्स हार्मोन के ऊंचे स्तर से अस्थमा की संभावना कम हो सकती है। इस शोध का उद्देश्य अस्थमा के मरीजों में टेस्टोस्टेरोन के रोल और सेक्स इच्छा के बारे में जानना था। साथ ही इसमें मोटापे से ग्रसित और शारीरिक रूप से फिट लोगों को भी शामिल किया गया है। जिन्हें अस्थमा की समस्या थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में, सबसे कम क्वारटाइल की तुलना में सबसे अधिक क्वारटाइल में मुक्त टेस्टोस्टेरोन का स्तर 41 प्रतिशत था, जो अस्थमा की संभावना को कम करना दर्शा रहा था। यह भी पढ़ें:
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