और से भी कई बीमारियों का इलाज किया जाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इलाज के इन तरीकों में ज्यादा वक्त लगता है, लेकिन इनका साइड इफेक्ट नहीं होता। एक्यूपंक्चर एक्सपर्ट डॉ. रमन कपूर बता रहे हैं इसी के बारे में: सुइयों से इलाज का कारगर तरीका एक्यू चीनी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है पॉइंट। हमारे शरीर में कुल 365 एनर्जी पॉइंट होते हैं। इन पॉइंट्स पर बारीक सूई से पंक्चर (छेद) कर इलाज किया जाए तो एक्यूपंक्चर कहलाता है और अगर उन्हीं पॉइंट्स पर हाथ से या किसी इक्युपमेंट से दबाव डाला जाए तो एक्यूप्रेशर। एक्यूपंक्चर को मेडिकल साइंस माना जाता है। डब्ल्यूएचओ ने भी एक्यूपंक्चर को असरदार बताया है। दरअसल, एक्यूप्रेशर में अंगूठों और उंगलियों की मदद से खास पॉइंट्स को दबाया जाता है। इसे हल्की-फुल्की बीमारी में तो असरदार माना जाता है, लेकिन क्रॉनिक यानी लंबे समय से चल रही बीमारी में इससे खास फायदा नहीं होता। अगर नस खिंचने से दर्द है तो एक्यूप्रेशर से फायदा हो सकता है, लेकिन स्लिप डिस्क या सर्वाइकल है तो फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है। पॉइंट्स पहचानकर खुद ही इसे कर सकते हैं। एक्यूप्रेशर में हर पॉइंट को दो-तीन मिनट दबाना होता है। आमतौर पर 3-4 सेशन में असर दिखने लगता है और 15-20 सिटिंग्स में पूरा आराम आ जाता है। वैसे, इलाज लंबा भी चल सकता है। कैसे काम करता है एक्यूपंक्चर एक्यूपंक्चर में शरीर के खास पॉइंट्स में बारीक सुई लगाई जाती हैं। एक सेशन आमतौर पर 40-60 मिनट का होता है और एक बार में 15-20 पॉइंट्स पंक्चर किए जाते हैं। अच्छे डॉक्टर इलाज से पहले इलेक्ट्रो मेरिडियन इमेजिंग (ईएमआई) टेस्ट करते हैं, जिसमें एनर्जी लेवल और पॉइंट्स की जांच की जाती है। एक्युपंक्चर माइग्रेन, तनाव से होने वाले सिरदर्द, एंग्जाइटी, साइनस, अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, चेहरे का लकवा, टॉन्सिल्स, आंख की बीमारी ऑप्टिक नर्व ऑट्रॉफी, पुराना जुकाम, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, आर्थराइटिस, बॉडी पेन, गैस, एसिडिटी, इनफर्टिलिटी और महिलाओं की दूसरी समस्याएं आदि में बहुत असरदार माना जाता है। इससे इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद मिलती है। एक्युपंक्चर हमेशा क्वॉलिफाइड डॉक्टर से अच्छे और साफ क्लिनिक में कराएं। खुद की इस्तेमाल की हुई सूइयां भी दोबारा इस्तेमाल न करें। ये पॉइंट्स हैं खास GV 20 या DU 20 कहां: सिर के बीचोंबीच, जहां कई लोग चोटी रखते हैं उपयोग: याददाश्त बढ़ाता है, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, हाइपर ऐक्टिविटी को कम कर मन को शांत करता है। पढ़नेवाले बच्चों के लिए खासतौर पर असरदार। GB 20 कहां: कान के पीछे के झुकाव में उपयोग: डिप्रेशन, सिरदर्द, चक्कर और सेंस ऑर्गन यानी नाक, कान और आंख से जुड़ी बीमारियों में राहत। दिमागी असंतुलन, लकवा और यूटरस की बीमारियों में असरदार। LI 11 कहां: कोहनी के बाहरी हिस्से पर। उपयोग: कॉलेस्ट्रॉल, ब्लडप्रेशर, गले में इन्फेक्शन, यूरिन इन्फेक्शन, उलटी, डायरिया, हिचकी, पीलिया आदि में। खून से संबंधित हर बीमारी में कारगर। ST 36 कहां: घुटने से चार उंगली नीचे, बाहर की तरफ। इस पर रोजाना मसाज कई बीमारियों से बचाता है। उपयोग: स्टैमिना बढ़ाता है। थकान और लंबी बीमारी के बाद ठीक होने में मदद करता है। पेट की बीमारियों असरदार। चेतना पॉइंट कहां: लेफ्ट हाथ में कलाई और कोहनी के बिल्कुल बीचोबीच। उपयोग: 30-35 साल की उम्र के बाद इसे नियमित रूप से दबाने से बुढ़ापा आने की रफ्तार कम होती है। यह नींद लाने में भी मदद करता है। कुछ खास टिप्स हमारे शरीर के कुल 365 पॉइंट्स में से कुछ ऐसे हैं, जो काफी असरदार हैं और कई तरह की बीमारियों में राहत दिलाते हैं। ये पॉइंट्स हैं: - मिट्टी में रोजाना 10-15 मिनट नंगे पैर चलें। नंगे पैर चलने से तलुवों में मौजूद पॉइंट्स दबते हैं, जिससे खून का दौर बढ़ता है। इससे थकान और तनाव कम होता है और पैरों, घुटनों व शरीर के दर्द में राहत मिलती है। जो लोग नंगे पांव नहीं चलना चाहते, वे सरसों या किसी भी तेल से तलुवों की जोर-जोर से तब तक मसाज करें, जब तक कि उनसे गर्मी न निकलने लगे। - हफ्ते में दो बार सिर की 5-10 मिनट अच्छी तरह से किसी भी तेल से मसाज करें। इसके अलावा सीवी 20 पॉइंट (जहां कई लोग चोटी रखते हैं) पर रोजाना 15-20 बार हल्के हाथ से मारें। इससे करीब 100 पॉइंट जागते हैं। डिप्रेशन से लेकर मेमरी लॉस, पार्किंसंस जैसी दिक्कतों में मदद मिलती है। - कान के नीचे वाले हिस्से (इयर लोब) की रोजाना पांच मिनट मालिश करने से याददाश्त बेहतर होती है। -नहाते हुए रोजाना तलुवों को ब्रश से 4-5 मिनट अच्छी तरह रगड़ें। - जीभ रोजाना अच्छी तरह से ब्रश के पीछे वाले हिस्से, जीभी या फिर उंगलियों से रगड़ कर साफ करें। जीभ में हार्ट, किडनी आदि के पॉइंट होते हैं। जीभ की सफाई के दौरान ये दबते हैं। - रोजाना 5-7 मिनट तालियां बजाएं। इससे हाथों में मौजूद एक्युप्रेशर पॉइंट जागते हैं। नोट: यहां बताए गए तरीके इम्यून सिस्टम बेहतर करते हैं। ध्यान रखें कि इनसे पूरी बीमारी ठीक नहीं होती, लेकिन राहत जरूर मिलेगी। बीमारी ठीक करने के लिए पूरा इलाज करना होगा। (प्रियंका सिंह से बातचीत पर आधारित)
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