सामान्य सिगरेट पीने को जहां स्मोकिंग कहते हैं वहीं, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट जिसे ई-सिगरेट भी कहा जाता है पीने की आदत को स्मोकिंग नहीं बल्कि कहा जाता है। दरअसल, ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाली डिवाइस है जिसमें लिक्विड भरा रहता है। यह निकोटीन और दूसरे हानिकारक केमिकल्स का घोल होता है। जब कोई व्यक्ति ई-सिगरेट का कश खींचता है तो हीटिंग डिवाइस इसे गर्म करके भाप (vapour)में बदल देती है। इसीलिए इसे स्मोकिंग नहीं (वेपिंग) कहा जाता है। वेपिंग से 49 तरह की गंभीर यूके में पिछले 5 साल से हो रही स्टडी में यह बात सामने आयी है कि ई-सिगरेट की वेपिंग की वजह से और दिल की बीमारी समेत 200 तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। ई-सिगरेट के बारे में मेडिसन ऐंड रेग्यूलेटरी एजेंसी की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट की मानें तो इन बीमारियों को 74 अलग-अलग येलो कार्ड रिपोर्ट में शामिल किया गया है जिसमें से 49 बीमारियां ऐसी हैं जिन्हें गंभीर बीमारियों की लिस्ट में रखा जाता है। ई-सिगरेट की वजह से महिला को हुआ निमोनिया हालांकि अब तक दुनियाभर में ई-सिगरेट और वेपिंग के रिस्क को कमतर आंका जा रहा था लेकिन यूके में ई-सिगरेट पीने की वजह से अब तक हुई 12 मौतें और फेफड़े को नुकसान पहुंचने के 805 मामले सामने आने के बाद अब इसकी गंभीरता से जांच की जा रही है। साल 2016 में बर्मिंगम में एक महिला को लिपिओइड निमोनिया होने की बात सामने आयी थी जिसकी वजह ई-सिगरेट में मौजूद वेजिटेबल ग्लिसरीन था। मोदी ने भी गिनाए ई-सिगरेट के नुकसान कुल मिलाकर देखें तो भारत में ई-सिगरेट को पूरी तरह सै बैन कर दिया गया है। रविवार 29 सितंबर को अपने मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं को ई-सिगरेट के खतरे के बारे में बताया और उनसे तंबाकू सेवन बंद करने की अपील की। मोदी ने कहा कि अधिकांश लोगों को ई-सिगरेट के खतरे के बारे में जानकारी नहीं है जबकि यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा, 'ई-सिगरेट में कई खतरनाक केमिकल्स मिलाए जाते हैं। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तंबाकू का नशा छोड़ दें और ई-सिगरेट के बारे में कोई भी गलतफहमी न पालें।'
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